ब्रह्रापुत्र नदी के नीचे बनेगी देश की पहली ट्विन ट्यूब अंडरवॉटर टनल, घंटों का सफर मिनटों में होगा पूरा, जानिए कैसा होगा डिजाइन

Underwater Twin Tube Tunnel: भारत में पहली बार ऐसी अंडरवाटर ट्विन-ट्यूब टनल बनाई जा रही है, जिसमें सड़क और रेल दोनों की सुविधा एक साथ होगी. इस सुरंग की खास बात यह है कि इसकी एक ट्यूब में ट्रेनों के लिए सिंगल ट्रैक होगा, जबकि दूसरी ट्यूब वाहनों के लिए होगी.
Underwater twin tube tunnel

ब्रह्रापुत्र ट्विन ट्यूब अंडरवॉटर टनल

Underwater Twin Tube Tunnel: मोदी कैबिनेट ने असम के लिए एक ऐतिहासिक सौगात दी है. सरकार ने ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे गोहपुर और नुमालीगढ़ को जोड़ने वाली देश की पहली अंडरवाटर रेल-सड़क टनल (Twin Tube Tunnel) के निर्माण को मंजूरी दे दी है. लगभग 15.8 किलोमीटर लंबी इस सुरंग के बनने से देश की तकनीक विकास होगा साथ ही सफर में लगने वाला समय भी काफी कम हो जाएगा. इस टनल के बनने से 240 किलोमीटर का लंबा रास्ता केवल 34 किलोमीटर रह जाएगा, जिससे क्षेत्र में कनेक्टिविटी और व्यापार को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा.

क्या-क्या होंगी सुविधाएं?

भारत में पहली बार ऐसी अंडरवाटर ट्विन-ट्यूब टनल बनाई जा रही है, जिसमें सड़क और रेल दोनों की सुविधा एक साथ होगी. इस सुरंग की खास बात यह है कि इसकी एक ट्यूब में ट्रेनों के लिए सिंगल ट्रैक होगा, जबकि दूसरी ट्यूब वाहनों के लिए होगी. यह प्रोजेक्ट देश की सुरक्षा के लिहाज से भी बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसकी मदद से किसी भी इमरजेंसी स्थिति में सेना के जवानों और गोला-बारूद को बहुत कम समय में एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जा सकेगा.

कैसा होगा ट्विन ट्यूब अंडरवॉटर टनल का डिजाइन?

  • इस टनल को ऐसे बनाया जाएगा कि जब ट्रेन अंदर से गुजरेगी, तो उस समय गाड़ियां नहीं चल सकेंगी.
  • इसमें ‘बैलिस्टिक ट्रैक’ का इस्तेमाल होगा और ट्रेनें पूरी तरह बिजली से चलेंगी.
  • टनल, सड़क और रेलवे ट्रैक को मिलाकर यह पूरा प्रोजेक्ट 33.7 किलोमीटर लंबा होगा.
  • इस पूरे काम को पूरा करने में लगभग 18,600 करोड़ रुपये का खर्च आएगा.
  • इस बड़े प्रोजेक्ट का खर्च तीन मंत्रालय यानी सड़क परिवहन, रेलवे और रक्षा मंत्रालय साथ मिलकर उठाएंगे.

घंटों का सफर मिनटों में पूरा हो सकेगा

  • बता दें कि यहां दो अलग-अलग सुरंगें बनाई जाएंगी, जिनमें से प्रत्येक में ट्रैफिक एक ही दिशा में चलेगा.
  • यह सुरंग ब्रह्मपुत्र नदी के सबसे गहरे हिस्से से भी 32 मीटर की गहराई पर बनेगी.
  • इस सुरंग के पूरा होने में 5 साल का समय लगेगा, जिसके बाद गोहपुर से नुमालीगढ़ जाने का समय साढ़े 6 घंटे से घटकर सिर्फ 34 मिनट रह जाएगा.
  • वहीं यात्रा की दूरी 240 किलोमीटर से घटकर केवल 34 किलोमीटर रह जाएगी.

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टनल के बनने से किन राज्यों को लाभ होगा?

इस अंडरवाटर टनल के बनने से अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और उत्तर-पूर्वी भारत के दूसरे राज्यों तक पहुंचना बहुत आसान हो जाएगा, जिससे वहां की कनेक्टिविटी काफी मजबूत होगी. जानकारी के अनुसार, पिछले साल वित्त मंत्रालय ने इस प्रोजेक्ट के लिए अपनी मंजूरी दे दी थी, जिसकी लगभग लागत लगभग 14,900 करोड़ रुपये है. इस खर्च को सड़क परिवहन और रक्षा मंत्रालय 80:20 के अनुपात में मिलकर उठाएंगे.

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