12 टिकट की मांग लेकिन कांग्रेस सिर्फ 1 सीट देने को राजी! क्या करेंगे स्वामी प्रसाद मौर्य?

Swami Prasad Maurya Congress Alliance: स्वामी प्रसाद अपने अलावा अपने समर्थकों और पार्टी से जुड़े नेताओं को भी चुनाव लड़ाना चाहते हैं, जिस पर कांग्रेस राजी नहीं है. क्योंकि कांग्रेस का मानना है कि ऐसे में कांग्रेस गठबंधन कमजोर होगा.
Swami Prasad Maurya

स्वामी प्रसाद मौर्य

Ticket Dispute Ahead of UP Polls: उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव है, लेकिन अभी से सियासी हलचल तेज हो गई है. प्रदेश में पिछड़ा वर्ग के बड़े नेताओं में शुमार और अपनी जनता पार्टी के मुखिया स्वामी प्रसाद मौर्य ने हाल ही में कांग्रेस के आलाकमान से मुलाकात की है, जिसके बाद प्रदेश में सियासी हलचल तेज हो गई. स्वामी प्रसाद मौर्य कांग्रेस के साथ मिलकर 10-12 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहते हैं, लेकिन कांग्रेस पार्टी उन्हें सिर्फ 1 सीट देने के लिए राजी हो रही है. वह भी कांग्रेस के टिकट पर. हालांकि, अभी तक कोई डील फाइनल नहीं हुई है.

जानकारी के अनुसार, अभी तक कांग्रेस आलाकमान और स्वामी प्रसाद मौर्य के बीच कोई आधिकारिक फाइनल डील नहीं हुई है. वहीं, सूत्रों की मानें तो स्वामी प्रसाद मौर्य अपनी पार्टी का कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के साथ गंठबंधन चाहते हैं. लेकिन कांग्रेस आलाकमान इसके लिए तैयार नहीं है. क्योंकि कांग्रेस अपने हिसाब से और स्वामी प्रसाद अपने हिसाब से चाहते हैं.

2 दिन पहले ही राहुल गांधी से की थी मुलाकात

कांग्रेस आलाकमान से दो दिन पहले स्वामी प्रसाद ने मुलाकात की थी, जिसकी फोटो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया था. उन्होंने मुलाकात को लेकर कहा था कि गठबंधन पर बात हुई है. जिसमें उन्होंने बताया कि हमने 12 सीटों की मांग की है. वहीं, कांग्रेस पार्टी चाहती है कि चाहे स्वामी प्रसाद हों या उनके बेटे उत्कृष्ट मौर्य अपनी पार्टी की बजाय कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ें, ताकि गठबंधन को मजबूती मिल सके.

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सिर्फ 1 सीट देने के लिए कांग्रेस राजी

स्वामी प्रसाद अपने अलावा अपने समर्थकों और पार्टी से जुड़े नेताओं को भी चुनाव लड़ाना चाहते हैं, जिस पर कांग्रेस राजी नहीं है. क्योंकि कांग्रेस का मानना है कि ऐसे में कांग्रेस गठबंधन कमजोर होगा. वर्तमान में स्वामी प्रसाद और उनके बेटे दोनों लोग विधानसभा का चुनाव हार चुके हैं. हालांकि, ऐसा नहीं है कि रायबरेली में जनाधार की कमी है. इन्हीं कारणों से कांग्रेस उन्हें छोड़ना नहीं चाहती है. अब देखना यह होगा कि दोनों मिलकर क्या बीच का रास्ता निकालते हैं?

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