पंजाब के बाद अब यूपी कांग्रेस अध्यक्ष ने की इस्तीफे की पेशकश? कौन लेगा अजय राय की जगह

UP Election 2027: उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय लल्लू ने अपने इस्तीफे की पेशकश की है. पार्टी सूत्रों की मानें तो आने वाले कुछ ही दिनों में कांग्रेस अपने नए प्रदेश अध्‍यक्ष के नाम का ऐलान कर सकती है.
Ajay Rai Congress Aradhna Mishra

अजय राय और आराधना मिश्रा

UP Election 2027: पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वडिंग के बाद अब उत्तर प्रदेश में कांग्रेस में भी हलचल पैदा हो गई है. ऐसा कहा जा रहा है कि मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष अजय राय लल्लू ने अपने इस्तीफे की पेशकश की है. उन्‍होंने अपना इस्तीफा हाईकमान को भेज दिया है.  माना जा रहा है कि पार्टी राज्य में जल्द ही किसी बड़े फैसले का ऐलान कर सकती है. इन सब अटकलों के बीच अजय राज का बयान भी सामने आया है, जिसमें उन्‍होंने कहा कि मैंने कोई इस्तीफ़ा नहीं दिया है. राहुल गांधी का सिपाही हूं. मरते दम तक भाजपा से लड़ता रहूंगा.

अजय राय लल्लू का इस्तीफे की खबर सही साबित होती है. तो एक ही हफ्ते में दो राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष का इस्तीफा राजनीतिक लिहाज से सामान्‍य नहीं है. यही वजह है कि इन इस्तीफों के बाद अब अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या कांग्रेस में भी कुछ ठीक नहीं चल रहा है.

क्यों अजय राय लल्‍लू दे सकते हैं इस्तीफा

अजय राय लल्लू के इस्तीफे को लेकर कई तरह की बातें इस समय राजनीतिक गलियारों में चल रही हैं. जिनमें टॉप पर पार्टी के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के बीच मतभेद इस ताजा घटनाक्रम की वजह माना जा रहा है. ऐसा कहा जा रहा है कि इन दोनों के मतभेद की खबरें आलाकमान तक भी पहुंच चुकी है. यही वजह है कि चुनावी साल में कांग्रेस कोई नया बखेड़ा खड़ा नहीं करना चाहती है.

किसे मिल सकती है यूपी कांग्रेस की कमान

राजनीतिक गलियारों में जिस तरह की चर्चाएं चल रही हैं, उसके मुताबिक पार्टी चुनावों को ध्‍यान में रखकर ही अपना नया प्रदेश अध्यक्ष चुनेगी. इनमें सबसे टॉप पर नाम रामपुर खास सीट से विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ का चल रहा है. हालांकि अब तक पार्टी की तरफ से इसकी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. लेकिन, लगभग यह तय माना जा रहा है कि पार्टी जल्द ही मोना के नाम का ऐलान कर सकती है.

कैसी होगी यूपी की नई कांग्रेस

मीडिया रिपोर्टों में प्रदेश अध्यक्ष के साथ 3 कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने की भी चर्चा है. जिनमें जातीय संतुलन बनाने की कोशिश की जाएगी. ये तीन कार्यकारी अध्यक्ष मुस्लिम, दलित और OBC के सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले को दर्शाएंगे. उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जिनमें अब महज कुछ महीनों का ही समय बचा हुआ है. ऐसे में कांग्रेस अपने इस फॉर्मूले के साथ कितना सफल हो पाती है. यह तो आने वाला समय ही बताएगा.

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