अब ‘नीले ड्रेस’ में दिखेंगे सपाई, अखिलेश की इस रणनीति से किसका नुकसान?
नीले गमछे में नजर आए अखिलेश यादव
Akhilesh Targets Dalit Youth: समाजवादी पार्टी के ड्रेस में अब लाल के साथ नीला रंग भी जुड़ गया है. अखिलेश यादव खुद एक बैठक के दौरान नीला गमछा डाले नजर आए थे. अब तो उन्होंने पार्टी में छात्र सभा के कार्यकर्ताओं का भी ड्रेस कोड बदल दिया. समाजवादी पार्टी के इस बदलाव को लेकर सियासी हलचल भी तेज हो गई है. अगले साल विधानसभा चुनाव है. विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सपा के इस बदलाव को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं.
समाजवादी पार्टी की पहचान सफेद कुर्ता-पायजामा, सिर पर लाल टोपी और गले पर गमछा काफी समय से रही है. लेकिन अब इसकी पहचान बदलती नजर आ रही है. हालांकि, अखिलेश यादव जब से पार्टी की कमान संभाले हैं. उन्होंने पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) के फॉर्मूले पर जोर दिया है. लेकिन बीच-बीच में अखिलेश यादव पीडीए का मतलब अलग बताने लगते हैं. एक बार फिर उन्होंने दलित बोटों को साधने और बसपा पर सेंध लगाने के चक्कर में ड्रेस कोड भी बदल दिया है.
अखिलेश के नीले ड्रेस ने बढ़ाई हलचल
उत्तर प्रदेश की राजनीति में भले ही बसपा के पास अब एक भी विधायक-सांसद नहीं हैं, लेकिन दलित वोटबैंक पर अच्छा खासा वर्चस्व है. भले ही बसपा की एक भी सीट प्रदेश में न आए, लेकिन बसपा हर पार्टी का खेल बिगाड़ने के लिए काफी है. इसी बीच अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी के ड्रेस कोड में बदलाव कर सबको चौंका दिया.
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दलित वोटरों को साधने में जुटे अखिलेश
बसपा की राजनीति डॉ. भीमराव अंबेडकर की विचारधारा से जुड़ी हुई है. बहुजन राजनीति में नीला रंग काफी समय से जुड़ा है. हालांकि, ऐसा कभी नहीं देखा गया है कि अखिलेश यादव सीधे तौर पर मायावती पर हमला किए हों. क्योंकि अखिलेश यादव हमेशा से पीडीए पर जोर दे रहे हैं. अब नीला ड्रेस को शामिल कर अखिलेश यादव दलित मतदाताओं को अपने पाले में करना चाह रहे हैं. इसके लिए हर जुगत पर जुटे हैं.