Bangladesh Elections में BNP को दो तिहाई बहुमत, तारिक रहमान बन सकते हैं अगले पीएम, सुधरेंगे भारत संग रिश्ते?

Bangladesh Election 2026: बांग्लादेश में तारिक रहमान की पार्टी BNP को दो तिहाई से ज्यादा बहुमत मिला है. तारिक रहमान बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं.
Bangladesh Election Result BNP Win

बांग्लादेश में BNP को दो तिहाई बहुमत

Bangladesh Election Result: बांग्लादेश में गुरुवार, 12 फरवरी को हुए राष्ट्रीय चुनाव के वोटों की गिनती जारी है. अब तक आए नतीजे के अनुसार, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को दो तिहाई से ज्यादा सीटों पर जीत मिली है. BNP तारिक रहमान की पार्टी है, जो पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के बेटे हैं. BNP अभी गठबंधन को 300 सदस्यों वाले जातीय संसद या देश के सदन में 209 सीटें जीती है. वहीं, छात्र नेतृव्य वाली NCP को चुनाव में करारा झटका लगा है. 30 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली NCP को 5 सीटें मिली हैं. जबकि जमात संगठन को लगभग 45 सीटें मिली हैं.

बांग्लादेश में राजनीति में कई सालों बाद बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. जिस प्रकार से तारिक रहमान की पार्टी ने एकतरफा जीत दर्ज की है. संभावना है कि तारिक रहमान अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं. लगभग 17 सालों बाद तारिक रहमान की सत्ता में वापसी हो रही है.

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के चेयरपर्सन तारिक रहमान ने 13वें आम चुनाव में बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. तारिक रहमान ने पार्टी की भारी जीत के बाद समर्थकों से नमाज पढ़ने और जीत का जुलूस न निकालने की अपील की है.

अमेरिका ने BNP को दी जीत की बधाई

बांग्लादेश में US एम्बेसडर ब्रेंट टी क्रिस्टेंसन ने ट्वीट किया, “बांग्लादेश के लोगों को सफल चुनाव के लिए बधाई और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और तारिक रहमान को ऐतिहासिक जीत के लिए बधाई. यूनाइटेड स्टेट्स आपके साथ मिलकर दोनों देशों की खुशहाली और सुरक्षा के साझा लक्ष्यों को पूरा करने के लिए उत्सुक है.”

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सुधरेंगे भारत संग रिश्ते?

बांग्लादेश में बीएनपी की जीत से भारत के साथ रिश्तों में भी सुधार आएगा. यानी भारत-बांग्लादेश संबंध टूटने की बजाय और मजबूत होंगे. तारिक रहमान की पार्टी का कहना है कि वे बांग्लादेश और भारत के बीच आपसी सम्मान पर आधारित संबंध चाहता है. यदि दोनों पक्ष व्यावहारिक रहें, जैसे तीस्ता संधि समझौता, व्यापार बढ़ाना ऐसी स्थिति में संबंध स्थिर रह सकते हैं. हालांकि इस दौरान रिश्तों को मजबूत करने के लिए कुछ चुनौतियां भी आ सकती हैं. जैसे अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग है. हालांकि, कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि अगर भारत के लिए बीएनपी की जीत सुखद नहीं रहेगी, तो कोई बुरा भी नहीं है. जबकि जमात की जीत पर रिश्तों में खटास बढ़ जाती.

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