OBC Reservation: ओबीसी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट में फिर टली सुनवाई, नवंबर के दूसरे हफ्ते में होगी

OBC Reservation: सुप्रीम कोर्ट में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर चल रही सुनवाई एक बार फिर टल गई है. इस मामले में अगली सुनवाई नवंबर महीने के दूसरे हफ्ते में होगी. राज्य सरकार ने जिरह के दौरान और समय मांगा है.
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सुप्रीम कोर्ट (File Photo)

OBC Reservation: सुप्रीम कोर्ट में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर चल रही सुनवाई फिर टल गई है. अब इस मामले में अगली सुनवाई नवंबर महीने के दूसरे सप्ताह में होगी. मध्य प्रदेश सरकार ने कोर्ट में इस मुद्दे से जुड़े विषयों पर अध्ययन के लिए और समय मांगा है. वहीं याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सरकार केस को खींच रही है.

‘कुछ विषयों पर आपस चर्चा करना है’

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जवाब के लिए समय मांग लिया. उन्होंने कोर्ट में कहा कि कुछ विषयों पर आपस चर्चा करना है, इसलिए छुट्टियों के बाद समय दीजिए. वहीं याचिकाकर्ताओं ने कहा कि इस पर अभी सुनवाई होनी चाहिए. दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए नवंबर महीने के दूसरे सप्ताह का समय दे दिया.

मामला बेहद पेचीदा है

ओबीसी आरक्षण का मुद्दा बहुत जटिल है और अभी तक इस मामले में कोई राह खुलती नजर नहीं आ रही है. इस मामले को प्रतिदिन सुनवाई के लिए कोर्ट ले जाया गया था. अब सुनवाई के दौरान समय मांगा जा रहा है, इससे मामला सुलझता हुआ नहीं लग रहा है. बुधवार (8 अक्टूबर) को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि न्यायालय ने कहा था कि इसे हाई कोर्ट भेजा जाना चाहिए. जब हाई कोर्ट से कोई निर्णय आएगा तब हम (सुप्रीम कोर्ट) इस पर रिएक्शन दे पाएंगे. आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से ज्यादा लांघी जा रही है और 73 फीसदी करने की योजना है, जो बेहद पेचीदा है.

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हाई कोर्ट वापस आ सकता है मामला

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई. राज्य सरकार ने जवाब पेश करने के लिए समय की मांग की थी. इस सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार तक का समय दिया था. इसके साथ ही उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि आप सभी लोग अपने पक्ष बताएं, हो सकता है कि अंतरिम लाभ दे दें या लाभ नहीं भी दें तो हम हाई कोर्ट को डायरेक्ट कर दे. कल आप सब लोग इस बात पर अपने तर्क दें कि इस मामले का कैसे जल्दी समाधान कर सकते हैं. हम इस मामले को उच्च न्यायालय भेज दें या अंतरिम राहत देकर हाई कोर्ट भेज दें क्योंकि हाई कोर्ट को अपने राज्य के बारे में अच्छे से जानकारी होती है. ये रिजर्वेशन का मामला है

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