क्या है धार का भोजशाला विवाद? 900 साल पुराना परिसर, नमाज और प्रार्थना के दावों को लेकर टकराव

Dhar Bhojshala Controversy: परमार वंश के राजा भोज ने साल 1034 में भोजशाला की स्थापना की थी. उस समय इसे सरस्वती सदन या सरस्वती कंठाभरण के नाम से जाना जाता था. इस परिसर में वाग्देवी यानी देवी सरस्वती की प्रतिमा स्थापित की गई थी.
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धार भोजशाला (फाइल फोटो)

Dhar Bhojshala Controversy: मध्य प्रदेश के धार में स्थित भोजशाला (Bhojshala) परिसर अक्सर सुर्खियों में रहता है. जब भी शुक्रवार के दिन बसंत पंचमी (Basant Panchmi) का त्योहार आता है तो मुस्लिम और हिंदू पक्ष में टकराव की स्थिति बनती है. मुस्लिम पक्ष जुमे की नमाज अदा करने और हिंदू पक्ष सरस्वती पूजा के लिए कहता है. यही वजह है कि इसे एमपी की ‘अयोध्या’ कहा जाता है.

992 साल पुराना भोजशाला परिसर

परमार वंश के राजा भोज ने साल 1034 में भोजशाला की स्थापना की थी. उस समय इसे सरस्वती सदन या सरस्वती कंठाभरण के नाम से जाना जाता था. इस परिसर में वाग्देवी यानी देवी सरस्वती की प्रतिमा स्थापित की गई थी. आज से 992 साल पहले ये ज्ञान-विज्ञान का केंद्र था. ये नालंदा और तक्षशिला की तरह आवासीय विश्वविद्यालय था. इस जगह विद्यार्थी और शिक्षक रहते थे. यहां गणित, तर्कशास्त्र जैसे विषयों का अध्ययन और अध्यापन किया जाता था.

इस ज्ञान-विज्ञान के केंद्र में बाणभट्ट, कालिदास, माघ, भवभूति, धनपाल जैसे विद्वान पढ़ाते थे. भोजशाला के बीचों-बीच एक हवन कुंड है. यहां बसंत पंचमी का दिन भव्य और दिव्य तरीके से मनाया जाता था, जिसकी परंपरा आज भी जारी है.

अलाउद्दीन खिलजी ने किया ध्वस्त

दिल्ली सल्तनल के खिलजी वंश के अलाउद्दीन खिलजी ने 1305 में भोजशाला और आसपास बनी इमारतों पर हमला किया और इन्हें ध्वस्त कर दिया. इससे पहले साल 1269 में अरब मूल के कमाल मौलाना यहां आकर बसे. सूफी संत कमल मौलाना 1269 में धार पहुंचे थे. इसके बाद दिलावर खां गौरी, 1514 में महमूद शाह खिलजी ने भी नुकसान पहुंचाया. भोजशाला के मुख्य द्वार के पास कमाल मौलाना मस्जिद निर्माण करवाया गया. आक्रमणकारियों ने भोजशाला की स्थिति बदली.

लंदन म्यूजियम में रखी है वाग्देवी की प्रतिमा

  • भोजशाला का पहला आर्कियोलॉजिकल सर्वे साल 1875 में किया गया. भोपावर के पॉलिटिकल एजेंट मेजर किनकैड ने यहां खुदाई की.
  • खुदाई के दौरान ब्रिटिशर्स को वाग्देवी की प्रतिमा मिली. इस प्रतिमा को अंग्रेज ब्रिटेन ले गए. आज भी लंदन म्यूजियम में इस वाग्देवी की प्रतिमा को देखा जा सकता है.

भोजशाला के शिलालेखों में क्या मिला?

  • भोजशाला में अलग-अलग समय पर सर्वे हुए. इनमें कई बातें सामने आई हैं. यहां कई शिलालेख और ताम्रपत्र मिले. जिनमें इस परिसर से जुड़ी कई सारी ऐतिहासिक जानकारियां हैं.
  • इनमें से एक शिलालेख में सरस्वतीये नम: का जिक्र मिलता है. वहीं एक अन्य शिलालेख में ॐ नमः शिवाय मंत्र लिखा मिलता है. इसमें ही बसंत लीला और राम जैसे शब्द प्राचीन भाषा में लिखे मिलते है.

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भोजशाला पर जैन पक्ष ने भी दावा किया

  • भोजशाला से परमारकालीन स्थापत्यकला के प्रमाण मिले हैं.
  • परिसर में मौजूद खंभो से भगवान कृष्ण, राम, ब्रह्मा, चतुर्भुज नारायण और भगवान हनुमान की मूर्तियां मिलीं.
  • जहां हिंदू पक्ष इसे मंदिर मानता है, वहीं मुस्लिम पक्ष मस्जिद कहता है.
  • भोजशाला पर जैन समाज ने अपना दावा किया है. यहां से खुदाई के दौरान तीर्थंकर नेमीनाथ की दो मूर्तियां मिली थीं.
  •  ASI ने इसे संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है.

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