MP SIR ने राजनीतिक दलों का बढ़ाया सिर दर्द, वोटर्स का नाम ना जुड़ पाने से कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे
सांकेतिक तस्वीर.
MP SIR: मध्य प्रदेश में राजनीति दालों की नींद इस समय उड़ी हुई है. वजह चुनावी जीत हार से जुड़ी है. दरअसल SIR में वोटर काटने का झटका तो पहले ही राजनीतिक दलों को लग चुका है, लेकिन अब कटे हुए नाम भी वापस नहीं जुड़ पाए, जिसके चलते राजनीतिक दल सड़कों पर उतरकर नाम जोड़ने की कवायत पर जुटे हुए हैं. हालांकि वोटों को लेकर सियासी रंग भी देखने को मिल रहा है.
एक तिहाई वोटर्स भी नाम जुड़वाने के लिए नहीं आए
चुनाव आयोग के 16 जनवरी तक के आंकड़े बताते हैं कि मंत्रियों की विधानसभा सीटों पर जितने वोट कटे हैं, उनकी तुलना में एक तिहाई भी आवेदन वोट जोड़ने के लिए नहीं आए. उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल की सीट पर यह अनुपात 16.9% है, वहीं मंत्री कैलाश विजयवर्गी की इंदौर -1 सीट में 14.4% आवेदन आए हैं, बाकी मंत्रियों की स्थिति भी अलग नहीं है. इसलिए बीजेपी प्रदेश संगठन चिंतित है, लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है. भाजपा हो या कांग्रेस दोनों ही राजनीतिक पार्टियों के कार्यकर्ता सड़कों पर आकर लोगों को वोटर आईडी में नाम जुड़वाने को लेकर लोगों के घर जाते दिखाई दे रहे हैं, क्योंकि आज दावा आपत्ति की आखिरी तारीख है. ऐसे लोग जिनका नाम SIR के पहले चरण में नहीं जुड़ा था, उनके दस्तावेज पूरे नहीं थे. जिसके चलते निर्वाचन ने उन्हें नोटिस भेजा था. हालांकि राजनीतिक दलों की धड़कनें तेज हो गई है. जिसके चलते भोपाल के अलग-अलग वार्डों में कांग्रेस और बीजेपी के कार्यकर्ता लोगों के घरों में जाते दिखाई दे रहे हैं. हालांकि विस्तार न्यूज़ से चर्चा करते हुए कांग्रेस और भाजपा के कार्यकर्ताओं ने कहा कि उनको पार्टी से निर्देश दिए गए हैं कि वह हर वार्ड पर लोगों के घर जाएं, लोगों से पूछें कि उनका नाम सूची में जुड़ा है या नहीं जुड़ा है. जिसके चलते कांग्रेस और बीजेपी पार्टी के कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर लोगों के घर जाते दिखाई दे रहा है.
सत्ताधारी पार्टी BJP का सिरदर्द बन चुका है SIR
हालांकि एसआईआर सताधारी पार्टी भाजपा के लिए भी सिर दर्द बन चुका है, क्योंकि प्रदेश भर में करीब 39.6 लाख वोटर कटे हैं. वहीं कांग्रेस बीजेपी सरकार के ऊपर वोट काटने का आरोप लगा रही है. वहीं वोट काटने से बीजेपी की भी टेंशन बढ़ती दिखाई दे रही हैं. हालांकि SIR को लेकर बयानबाजी जारी है. वहीं कांग्रेस का प्रतिनिधित्व मंडल निर्वाचन आयोग पहुंचा, जहां निर्वाचन से कांग्रेस ने शिकायत की है. बीजेपी पार्टी के दबाव में अधिकारी कर्मचारी काम न करें. अगर कोई भी नाम काटा तो कांग्रेस उस अधिकारी के खिलाफ केस दर्ज करवाएगी. हालांकि बीजेपी का कहना है पार्टी ने निर्देश दिए हैं कि सभी कार्यकर्ताओं अपने वार्ड के सभी लोगों का नाम मतदान सूची पर जुड़वाएं, बीजेपी वोट की राजनीति नहीं करती हैं.