MP के IPS अधिकारी अभिषेक तिवारी का इस्तीफा, 2024 में सागर में चार बच्चों की दीवार गिरने से मौत के मामले में हटाए गए थे

अभिषेक तिवारी दिल्ली में फिलहाल जिस एजेंसी में वह पदस्थ है. वह नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी के अंतर्गत आता है. वह 2 सालों से दिल्ली में पदस्थ हैं. मध्य प्रदेश में बेहतर कामकाज के लिए उन्हें दो बार प्रेसिडेंट मेडल भी मिल चुका है.
IPS Abhishek Sharma (File Photo)

IPS अभिषेक शर्मा(File Photo)

MP IPS Abhishek Tiwari: मध्य प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी अभिषेक तिवारी ने इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने वीआरएस लेते हुए केंद्र और राज्य सरकार को जानकारी दी है. अभिषेक तिवारी 2 साल पहले मध्य प्रदेश से दिल्ली में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ हैं. फिलहाल वह नेशनल टेक्नोलॉजी रिसर्च आर्गेनाईजेशन में पदस्थ है. मध्य प्रदेश के बालाघाट सागर जिले में पुलिस अधीक्षक के तौर पर सेवाएं दे चुके हैं.

IPS अभिषेक तिवारी ने इस्तीफा क्यों दिया?

अभिषेक तिवारी के इस्तीफा देने के पीछे निजी कारण बताए जा रहे हैं. इस्तीफा मंजूर होने के बाद वह कोई नया काम देखेंगे, लेकिन आखिर क्या कारण है कि अभिषेक तिवारी ने इस्तीफा दे दिया. यह अभी भी चर्चा का विषय बना हुआ है. फिलहाल पुलिस के कई अधिकारियों ने अभिषेक तिवारी के इस्तीफा दिए जाने पर पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि निजी कार्यों का हवाला देते हुए आईपीएस अभिषेक तिवारी ने इस्तीफा दिया है. कई विशेष कार्यों के लिए उन्हें बड़े पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है.

2 सालों से दिल्ली में पदस्थ हैं

दिल्ली में फिलहाल जिस एजेंसी में वह पदस्थ है. वह नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी के अंतर्गत आता है. वह 2 सालों से दिल्ली में पदस्थ हैं. मध्य प्रदेश में बेहतर कामकाज के लिए उन्हें दो बार प्रेसिडेंट मेडल भी मिल चुका है. इसके अलावा मध्य प्रदेश में कई बार विशेष कार्यों के लिए राज्य सरकार सम्मानित भी कर चुकी है.

सागर से नौ बच्चों की मौत के बाद हटाए गए थे अभिषेक तिवारी

मध्य प्रदेश के सागर में रहते हुए एक घटना बड़ी हुई थी. सागर जिले में बारिश के दौरान दीवार धंसने की वजह से नौ बच्चों की मौत हो गई थी. जिसमें कई परिवार के मासूम बच्चों की मौत हुई थी. इस मामले में सरकार ने तत्काल प्रभाव से पुलिस अधीक्षक रहे अभिषेक तिवारी को हटा दिया था. जिसके बाद वह प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली चले गए थे. फिलहाल अभिषेक तिवारी का इस्तीफा कई स्तर पर मंजूर होना बाकी है. विभागीय जांच के संबंध में गृह विभाग को पुलिस विभाग की रिपोर्ट के आधार पर केंद्रीय गृह मंत्रालय की स्वीकृति अनिवार्य रहेगी. इसके अलावा मध्य प्रदेश गृह विभाग भी वीआरएस को मंजूरी देने पर फैसला लेगा.

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