MP कांग्रेस में नेतृत्व फेल! दिल्ली तक पहुंचा अनुशासनहीनता का मामला तो BJP ने ली चुटकी, कहा- अव्यवस्था, अहंकार और…
MP कांग्रेस पर BJP का तंज
MP News: मध्य प्रदेश कांग्रेस इस वक्त अव्यवस्था, अहंकार और असफल नेतृत्व की गंभीर स्थिति से गुजर रही है. हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि प्रदेश प्रभारी और नेता प्रतिपक्ष को पार्टी की आंतरिक अनुशासनहीनता की शिकायत लेकर दिल्ली तक जाना पड़ा. यह घटनाक्रम संगठनात्मक विफलता का खुला प्रमाण माना जा रहा है. दिल्ली में हुई कांग्रेस नेताओं की बैठक के बाद भाजपा ने निशाना साधा है और पार्टी पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. BJP के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट की है.
BJP ने ली चुटकी
BJP के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने लिखा- ‘MP कांग्रेस: अव्यवस्था, अहंकार और असफल नेतृत्व की मिसाल! जब प्रदेश प्रभारी और नेता प्रतिपक्ष को ही दिल्ली जाकर अपनी पार्टी की अनुशासनहीनता गिनानी पड़े- तो समझिए नेतृत्व फेल है. जब अपने ही नेता प्रदेश अध्यक्ष की क्षमता पर सवाल उठाएं- तो समझिए संगठन खोखला है. और जहां न विश्वास है, न दिशा, न जवाबदेही- वहां राजनीति नहीं, सिर्फ अराजकता बचती है. MP कांग्रेस आज विपक्ष नहीं, आंतरिक कलह का संग्रहालय बन चुकी है.’
*MP कांग्रेस: अव्यवस्था, अहंकार और असफल नेतृत्व की मिसाल!*
— Ashish Usha Agarwal आशीष ऊषा अग्रवाल (@Ashish_HG) January 29, 2026
जब प्रदेश प्रभारी और नेता प्रतिपक्ष को ही दिल्ली जाकर अपनी पार्टी की अनुशासनहीनता गिनानी पड़े—तो समझिए नेतृत्व फेल है।
जब अपने ही नेता प्रदेश अध्यक्ष की क्षमता पर सवाल उठाएँ—तो समझिए संगठन खोखला है।
और जहाँ
न विश्वास… pic.twitter.com/yrT9NWAICe
पार्टी के भीतर हालात तब और चिंताजनक हो गए, जब कांग्रेस के ही वरिष्ठ नेताओं ने प्रदेश अध्यक्ष की कार्यक्षमता और नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए. इससे साफ है कि संगठन में न तो आपसी भरोसा बचा है और न ही स्पष्ट दिशा या जवाबदेही.
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस में गुटबाजी इस स्तर तक पहुंच चुकी है कि नेतृत्व का कोई भी निर्णय सर्वमान्य नहीं रह गया है. विपक्ष की भूमिका निभाने के बजाय पार्टी अपनी ही आंतरिक लड़ाइयों में उलझी नजर आ रही है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जहां नेतृत्व अहंकार से ग्रस्त हो, संगठन अनुशासनहीन हो और कार्यकर्ताओं में भ्रम हो- वहां रचनात्मक राजनीति संभव नहीं होती. ऐसे हालात में विपक्ष कमजोर होता है और लोकतांत्रिक संतुलन भी प्रभावित होता है. आज की स्थिति में मध्य प्रदेश कांग्रेस एक सशक्त विपक्ष के रूप में नहीं, बल्कि आंतरिक कलह और नेतृत्व संघर्ष के केंद्र के रूप में देखी जा रही है.
अनुशासन समिति के अध्यक्ष भी यह मुद्दा उठा चुके हैं. विस्तार न्यूज के सवाल पर पिछले दिनों मध्य प्रदेश अनुशासन समिति कांग्रेस के सीनियर नेता राजेंद्र सिंह भी यह सवाल उठा चुके हैं. उन्होंने कहा कि हम कई बार सिफारिश भी करते हैं, लेकिन कार्रवाई का अधिकार उन पर नहीं है. पार्टी जिस स्तर पर काम करती है उसका असर भी दिखाई देता है. अगर कोई नेता शिकायत देता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होती है. अगर नेता शिकायत ही नहीं करेगा तो फिर भला समिति कैसे कार्रवाई करेगी. यह बात हालांकि पार्टी हाई कमान को भी पता है. इसलिए पिछले दिनों दिल्ली में हुई बैठक में अनुशासनहीनता का जिक्र किया गया और पार्टी को गरीब कल्याण और युवाओं के मुद्दे को भी साधने के लिए निर्देश दिए.