महाराष्ट्र में डिप्टी सीएम पद को लेकर हलचल तेज, CM फडणवीस से मिले NCP के नेता, अजित पवार के विभागों पर ठोका दावा

Maharashtra Politics: एनसीपी का मानना है कि गठबंधन की सरकार में शक्ति और संतुलन को बरकरार रखने के लिए एनपीसी के पास अजित पवार को मिलने वाले मंत्रालय रहना जरूरी है.
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अजित पवार

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का विमान हादसे में निधन हुए अभी एक सप्ताह भी नहीं हुए कि रानजीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं. आज शुक्रवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से एनसीपी के वरिष्ठ नेताओं ने मुलाकात की है. दावा किया जा रहा है कि इस मुलाकात के दौरान अजित पवार के पुराने विभाग-वित्त राज्य उत्पाद शुल्क और खेल विभाग एनसीपी कोटे में ही रखने के लिए मुलाकात की गई है और जल्द ही इसका औपचारिक रूप से एनसीपी नेतृव्य पत्र सौंपेगा. फिलहाल, ये पद किसे दिए जाएंगे. इसको लेकर अभी किसी का नाम फाइनल नहीं किया गया है.

जानकारी के अनुसार, एनसीपी के वरिष्ठ नेता छगन भगबल, सुनील तटकरे और प्रफल्ल पटेल ने सीएम फडणवीस से उनके आधिकारिक आवास ‘वर्षा’ पहुंचकर मुलाकात की है. जिसमें अजित पवार के पुराने विभाग को एनसीपी कोटे में रखे जाने की मांग की है. एनसीपी का मकसद है कि कैबिनेट में जो भी पद अजित पवार के पास रहे उन पदों पर पार्टी की पकड़ बरकरार रहे. यह पद एनसीपी के बाहर नहीं जाने चाहिए.

पत्नी को डिप्टी सीएम बनाने की रही चर्चा

  • एनसीपी का मानना है कि गठबंधन की सरकार में शक्ति और संतुलन को बरकरार रखने के लिए एनपीसी के पास अजित पवार को मिलने वाले मंत्रालय रहना जरूरी है. हालांकि यह कमान किसको सौंपी जाएगी, अभी इस पर पार्टी की ओर से कोई बयान नहीं आया है और न ही चर्चा की गई है.
  • गुरुवार को चर्चा जरूर रही कि अजित पवार की पत्नी को डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है लेकिन इसमें कितनी सच्चाई है. यह सिर्फ पार्टी को ही पता होगा. क्योंकि पार्टी की ओर से इन अटकलों पर कोई बयान नहीं आया है.

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किन नेताओं को मिलेगा जिम्मेदारी?

दरअसल, अजित पवार की मौत के बाद उनके पास रहे मंत्रालय खाली हो गए हैं. ऐसे में उन पदों को एनसीपी कोटे में ही रखा जाए. इसके लिए एनसीपी के वरिष्ठ नेताओं ने सीएम से मुलाकात की है. माना जा रहा है कि जल्द ही इसको लेकर आधिकारिक पत्र सौंपा जाएगा. एनसीपी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि अगर अजित पवार को मिले पद गणबंधन के किसी और दल को दिया जाता है तो इससे पार्टी का प्रभाव कम होगा. अब देखना यह होगा कि एनसीपी के किन नेताओं को मंत्रायलय में विभाग सौंपा जाएगा.

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