MP News: जबलपुर मेडिकल कॉलेज में रैगिंग का मामला, MBBS के 8 स्टूडेंट्स 6 महीने के लिए सस्पेंड, हॉस्टल से निकाले गए

MP News: मेडिकल प्रशासन की ओर से बनाई गई एंटी रैगिंग कमेटी की ओर से की गई जांच में रैगिंग की पुष्टि हुई थी. इसी आधार पर कॉलेज प्रबंधन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई का फैसला लिया. दोषी छात्रों को 6 महीने के लिए कक्षाओं के साथ-साथ हॉस्टल से भी निष्कासित किया गया है.
Jabalpur Medical College

जबलपुर मेडिकल कॉलेज

MP News: जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में रैगिंग के आरोप में एमबीबीएस (MBBS) के आठ छात्रों को निलंबित कर दिया गया है. मेडिकल प्रबंधन ने छात्रों के खिलाफ न केवल सस्पेंशन की कार्रवाई की है बल्कि 10-10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है. इसके साथ ही मेडिकल प्रबंधन ने छात्रों को चेतावनी भी दी है कि अगर भविष्य में ऐसी घटनाओं को दोहराया जाता है तो छात्रों के खिलाफ बर्खास्त की कार्रवाई भी की जाएगी.

आरोपी स्टूडेंट्स को हॉस्टल से निकाला गया

मेडिकल प्रशासन की ओर से बनाई गई एंटी रैगिंग कमेटी की ओर से की गई जांच में रैगिंग की पुष्टि हुई थी. इसी आधार पर कॉलेज प्रबंधन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई का फैसला लिया. प्रशासन की ओर से जारी है आदेश के मुताबिक दोषी छात्रों को 6 महीने के लिए कक्षाओं के साथ-साथ हॉस्टल से भी निष्कासित किया गया है.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज की बॉयज हॉस्टल क्रमांक 1 में 2024 बैच की कुछ जूनियर छात्रों के साथ रैगिंग की घटना हुई थी. पीड़ित छात्रों में से एक छात्र के द्वारा मेडिकल प्रबंधन को शिकायत की गई. शिकायत के बाद मेडिकल प्रबंधन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एंटी रैगिंग कमेटी का गठन किया. जिसने पूरे मामले की जांच की गई. पीड़ित छात्र ने शिकायत में कहा था कि हॉस्टल क्रमांक 4 से एमबीबीएस प्रथम वर्ष के बाद जब छात्र दूसरे हॉस्टल में जाते हैं, तो वहां पहले से रह रहे सीनियर छात्र उनके शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं.

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इन आरोपों की जांच के बाद साल 2023 बैच के आठ छात्रों को दोषी पाया गया पूछताछ में छात्रों ने भी यह बात कबूल किया कि उन्होंने जूनियर छात्रों के साथ दुर्व्यवहार किया है शिकायत की पुष्टि और सीनियर छात्रों के कबूलनामे के बाद मेडिकल प्रशासन ने यह सख्त कदम उठाया. एंटी रैगिंग कमेटी ने एमबीबीएस छात्रों के खिलाफ यह कार्रवाई राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग की ओर से प्रकाशित राजपत्र में निर्धारित नियमों के तहत की गई है.

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