Sehore News: VIT फूड पॉयजनिंग मामले में दो महीने बाद भी कार्रवाई नहीं, फिर विधानसभा में गूंजेगा मुद्दा

Sehore News: विधानसभा में सवाल उठने पर उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने आश्वासन दिया था कि वीआईटी यूनिवर्सिटी पर ऐसी कार्रवाई की जाएगी, जो प्रदेश के सभी निजी विश्वविद्यालयों के लिए नजीर बनेगी.
VIT University Sehore

वीआईटी यूनिवर्सिटी सीहोर (फाइल फोटो)

Sehore News: सीहोर स्थित वीआईटी यूनिवर्सिटी में फूड पॉयजनिंग और पीलिया फैलने के गंभीर मामले को लेकर राज्य सरकार दो महीने बीतने के बावजूद कोई ठोस निर्णय नहीं ले सकी है. यह मामला पहले ही विधानसभा में जोर-शोर से उठ चुका है और अब एक बार फिर सदन में सरकार को घेरने की तैयारी है. विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के कुछ विधायकों में भी कार्रवाई न होने को लेकर नाराज़गी है.

दो महीने बद भी यूनिवर्सिटी पर कोई कार्रवाई नहीं

विधानसभा में सवाल उठने पर उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने आश्वासन दिया था कि वीआईटी यूनिवर्सिटी पर ऐसी कार्रवाई की जाएगी, जो प्रदेश के सभी निजी विश्वविद्यालयों के लिए नजीर बनेगी. हालांकि, दो महीने बाद भी न तो कार्रवाई सामने आई और न ही कोई आदेश जारी हुआ. इससे मंत्री के बयान और सरकार की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

VIT यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने शासन को जवाब सौंपा

  • सरकारी सूत्रों के अनुसार, वीआईटी यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने शासन को अपना जवाब सौंप दिया है, जिसमें सभी आरोपों को निराधार बताया गया है.
  • प्रबंधन ने दूषित भोजन और पानी की जिम्मेदारी लेने के बजाय पूरे घटनाक्रम का ठीकरा विद्यार्थियों पर ही फोड़ दिया है.
  • जवाब के आधार पर उच्च शिक्षा विभाग ने यूनिवर्सिटी पर प्रस्तावित कार्रवाई का ड्राफ्ट तैयार कर शासन को भेज दिया है, लेकिन मामला अब उच्च स्तर पर ठंडे बस्ते में चला गया है.
  • उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार का कहना है कि कमेटी की जांच रिपोर्ट और यूनिवर्सिटी प्रबंधन के जवाबों का परीक्षण कर रिपोर्ट तैयार कर ली गई है और अंतिम निर्णय शासन स्तर पर लिया जाना है.
  • हालांकि, लगातार देरी से सरकार की गंभीरता पर सवाल उठ रहे हैं.

कमेटी रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ?

घटना की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट ने यूनिवर्सिटी प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि वीआईटी यूनिवर्सिटी में तानाशाहीपूर्ण रवैया अपनाया जाता था. शिकायत करने वाले विद्यार्थियों को फेल करने की धमकी, आई-कार्ड जब्त कर परीक्षा से रोकना और प्रायोगिक परीक्षाओं में कम अंक देने जैसी बातें सामने आई हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, दूषित भोजन और पानी को लेकर नवंबर माह से लगातार शिकायतें की जा रही थीं, लेकिन प्रबंधन ने ध्यान नहीं दिया.

नतीजतन हॉस्टल में रह रहे कम से कम 35 विद्यार्थियों में पीलिया के लक्षण सामने आए. हालात बिगड़ने पर छात्रों का आक्रोश फूट पड़ा और कैंपस में झड़पें हुईं. इस दौरान कुछ उपद्रवियों ने वाहनों में आग भी लगा दी.

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सुरक्षा कर्मियों ने पुलिस को जांच करने से रोका

सबसे गंभीर बात यह रही कि जब पुलिस मौके पर जांच के लिए पहुंची, तो सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें कैंपस में प्रवेश तक नहीं करने दिया. यह तथ्य भी कमेटी की रिपोर्ट में दर्ज है. अब जबकि विधानसभा सत्र नजदीक है, विपक्ष इस मुद्दे को फिर से उठाने की तैयारी में है. सवाल यही है कि क्या सरकार अपने मंत्री के ‘नजीर बनने वाली कार्रवाई’ के वादे पर खरी उतरेगी या वीआईटी मामला फाइलों में ही दबा रह जाएगा.

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