MP News: छिंदवाड़ा कफ सिरप मौत मामला, लोकसभा में केंद्र का जवाब, 19 में से 4 सैंपल फेल, सिरप में 46% जहरीला केमिकल DEG

MP News: छिंदवाड़ा जिले में जहरीले कफ सिरप के सेवन से बच्चों की मौत के मामले में केंद्र सरकार ने लोकसभा में विस्तृत जवाब दिया है.
Madhya Pradesh cough syrup case

कफ सिरप (सांकेतिक तस्वीर)

MP News: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में जहरीले कफ सिरप के सेवन से बच्चों की मौत के मामले में केंद्र सरकार ने लोकसभा में विस्तृत जवाब दिया है. सरकार ने बताया कि मामले की गहन जांच की गई और दोषी कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है. केंद्र सरकार के अनुसार, बच्चों की मौत की सूचना मिलने के बाद राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC), राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (NIV) और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की संयुक्त विशेषज्ञ टीम छिंदवाड़ा और नागपुर पहुंची.

टीम में महामारी विशेषज्ञ, माइक्रोबायोलॉजिस्ट, कीटविज्ञानी और ड्रग इंस्पेक्टर शामिल थे. जांच के दौरान इलाज कर रहे निजी डॉक्टरों और आसपास के मेडिकल स्टोर्स से कुल 19 दवाओं के सैंपल लिए गए.

4 सैंपल अवमानक घोषित

  • 15 सैंपल मानक गुणवत्ता के पाए गए.
  • 4 सैंपल अवमानक (NSQ) घोषित किए गए.

रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित मेसर्स श्रीसन फार्मास्युटिकल द्वारा निर्मित कोल्ड्रिफ कफ सिरप (बैच नंबर SR-13) में डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) की मात्रा 46.28% w/v पाई गई, जो अत्यंत जहरीली है.

निर्माता पर सख्त कार्रवाई

CDSCO द्वारा कंपनी परिसर के निरीक्षण में गंभीर GMP उल्लंघन पाए गए, जिनमें अस्वच्छ भंडारण जैसी खामियां शामिल हैं. तमिलनाडु ड्रग कंट्रोलर ने कंपनी का मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस रद्द किया. मध्य प्रदेश में आपराधिक मामला दर्ज, गिरफ्तारियां भी हुईं. मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, ओडिशा और पुडुचेरी में संबंधित बैच पर तत्काल प्रतिबंध और रिकॉल किया गया.

देशभर में निगरानी बढ़ी

  • 1100 से अधिक कफ सिरप निर्माताओं का ऑडिट किया गया.
  • सिरप फॉर्मूलेशन के मार्केट सैंपलिंग को तेज किया गया.
  • 3 अक्टूबर 2025 को बच्चों में कफ सिरप के विवेकपूर्ण उपयोग को लेकर एडवाइजरी जारी की गई.
  • 7 और 27 अक्टूबर 2025 को सभी राज्यों को नकली और घटिया दवाओं पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए.

नए नियम भी लागू

भारतीय फार्माकोपिया आयोग, गाजियाबाद ने IP 2022 में संशोधन कर अब ओरल लिक्विड दवाओं में DEG और EG की जांच को बाजार में जारी करने से पहले अनिवार्य कर दिया है.

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