MP में 6 साल में 1% मजदूरों को भी नहीं मिला 100 दिन काम, 24 जिलों में शून्य रोजगार, कांग्रेस ने 125 दिनों के वादे पर उठाए सवाल
सांकेतिक तस्वीर.
MP News: मध्य प्रदेश में ग्रामीण रोजगार की रीढ़ मानी जाने वाली मनरेगा योजना को लेकर विधानसभा में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल के प्रश्न के लिखित उत्तर में पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल ने स्वीकार किया कि पिछले पांच वर्षों में एक प्रतिशत मजदूरों को भी पूरे 100 दिन का रोजगार नहीं मिल पाया.
सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में 1 करोड़ 70 लाख से अधिक मजदूर पंजीकृत थे, लेकिन केवल 1 लाख 23 हजार 624 परिवारों को ही 100 दिन का रोजगार मिला. वर्ष 2022 में 1.81 करोड़ पंजीकृत मजदूरों में से मात्र 63 हजार 898 परिवारों को 100 दिन काम मिला. 2023 में यह संख्या घटकर 40 हजार 588, 2024 में 30 हजार 420 और 2025 में 32 हजार 560 परिवारों तक सिमट गई. दिलचस्प तथ्य यह है कि मनरेगा पोर्टल पर जॉब कार्डधारी परिवारों की संख्या लगातार बढ़ती रही. वित्तीय वर्ष 2021-22 में 86.65 लाख परिवार पंजीकृत थे, जो 2025-26 में बढ़कर 98.15 लाख हो गए. इसके बावजूद 100 दिन का रोजगार पाने वाले परिवारों का प्रतिशत बेहद कम रहा.
वन अधिकार वाले मजदूरों की भी हालत खराब
वनाधिकार पट्टा धारकों को 150 दिन रोजगार देने का प्रावधान भी कागजों तक सीमित दिख रहा है. वर्ष 2025-26 में 24 जिलों में एक भी परिवार को 150 दिन का रोजगार नहीं मिला. आदिवासी बहुल झाबुआ में 150 दिन रोजगार का आंकड़ा शून्य रहा. सबसे अधिक 150 दिन रोजगार अलीराजपुर में 112 परिवारों को मिला, जबकि छिंदवाड़ा में 28, धार में 21, मंडला में 17 और दमोह में 16 परिवारों को लाभ मिला.
जॉब कार्ड से हटाए गए मजदूरों के नाम
मजदूरी की मांग के आंकड़े भी सरकार की चुनौती को उजागर करते हैं. कोविड वर्ष 2021-22 में 61 लाख 66 हजार से अधिक परिवारों के 1 करोड़ 21 लाख से ज्यादा श्रमिकों ने रोजगार की मांग की थी. इसके बाद भी हर वर्ष लाखों परिवार काम मांगते रहे, लेकिन पर्याप्त रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जा सका. इसी दौरान बड़ी संख्या में जॉब कार्ड से नाम भी हटाए गए. वर्ष 2021 में 10 लाख 46 हजार परिवारों के 43 लाख से अधिक श्रमिकों के नाम काटे गए। 2022 से 2025 तक भी हजारों परिवारों और लाखों श्रमिकों को सूची से बाहर किया गया.
लगातार हुई गिरावट फंड भी हुआ कम
वित्तीय आंकड़े भी गिरावट की ओर इशारा करते हैं. वर्ष 2020-21 में योजना पर 9,338 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए थे, जो 2024-25 में घटकर 6,731 करोड़ रुपये रह गए.मानव दिवस 34.17 करोड़ से घटकर 18.96 करोड़ रह गए. प्रति जॉब कार्ड परिवार को मिलने वाले औसत कार्य दिवस 61.84 से घटकर 49.13 रह गए.
कांग्रेस विधायक का दावा – 25 दिन का रोजगार का दावा झूठा
प्रताप ग्रेवाल ने आरोप लगाया कि मनरेगा का नाम बदलकर “विकसित भारत-गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)” करना और 125 दिन रोजगार का दावा करना केवल जनता को भ्रमित करने का प्रयास है. उनका कहना है कि जब 100 दिन की गारंटी पूरी नहीं हो पा रही, तब 125 दिन का वादा वास्तविकता से दूर है.
ये भी पढ़ें: MP के 119 राजस्व निरीक्षक बने प्रभारी नायब तहसीलदार, नए जिलों में हुई पोस्टिंग; राजस्व विभाग ने जारी किए आदेश