MP News: 7.37 लाख में से 3.71 लाख बच्चे सामान्य, कुपोषण के खिलाफ अभियान को लेकर सरकार का दावा

वर्तमान में प्रदेश के करीब 97 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों से 84 लाख हितग्राही जुड़े हुए हैं. सेवाओं की पारदर्शिता और निगरानी सुनिश्चित करने के लिए आंगनबाड़ियों में जियो-फेंसिंग आधारित ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली लागू की गई है, जिससे कार्यकर्ताओं और हितग्राहियों की उपस्थिति की वास्तविक समय में मॉनिटरिंग हो सके.
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MP News: मध्य प्रदेश में कुपोषण के खिलाफ चल रहे अभियान को लेकर सरकार ने बड़ा दावा किया है. वर्ष 2025 के आंकड़ों के अनुसार गंभीर रूप से कुपोषित 7.37 लाख बच्चों में से 3.71 लाख बच्चों को सामान्य पोषण स्तर पर लाया गया है. सरकार का कहना है कि यह सुधार लक्षित हस्तक्षेप, पोषण ट्रैकिंग और आंगनबाड़ी तंत्र की मजबूती का परिणाम है.

महिला एवं बाल विकास को 32,730 करोड़ का बजट

नए वित्तीय वर्ष में कुपोषण से लड़ाई को और तेज करने के लिए ‘सक्षम आंगनबाड़ी’ और ‘पोषण 2.0’ योजनाओं के तहत 3,768 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. वहीं वर्ष 2026-27 के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग को कुल 32,730 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जो विभागीय योजनाओं के विस्तार और आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने में खर्च होगा.

5,263 नए आंगनबाड़ी भवन निर्माणाधीन

मध्य प्रदेश में आंगनबाड़ी सेवाओं के विस्तार के लिए 5,263 नए भवनों का निर्माण कराया जा रहा है. इसके साथ ही 38,900 आंगनबाड़ी भवनों में विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है. भवन निर्माण, उन्नयन और आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए 459 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.

वर्तमान में प्रदेश के करीब 97 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों से 84 लाख हितग्राही जुड़े हुए हैं. सेवाओं की पारदर्शिता और निगरानी सुनिश्चित करने के लिए आंगनबाड़ियों में जियो-फेंसिंग आधारित ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली लागू की गई है, जिससे कार्यकर्ताओं और हितग्राहियों की उपस्थिति की वास्तविक समय में मॉनिटरिंग हो सके.

जनजातीय क्षेत्रों में विशेष फोकस

महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने बताया कि प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) के तहत बैगा, भारिया और सहरिया समुदायों के लिए 704 विशेष आंगनबाड़ी भवन स्वीकृत किए गए हैं. वर्ष 2023-24 में स्वीकृत 217 भवनों में से 150 भवन पूर्ण कर प्रदेश ने देश में प्रथम स्थान हासिल किया है.

सरकार का दावा है कि पोषण सर्वेक्षण, पूरक आहार, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और समुदाय आधारित पोषण जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए कुपोषण की दर में कमी लाई जा रही है. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि कुपोषण की स्थायी रोकथाम के लिए स्वास्थ्य, स्वच्छता, मातृ पोषण और आय सशक्तिकरण जैसे बहुआयामी प्रयासों को निरंतर और प्रभावी ढंग से लागू करना जरूरी होगा.

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