ममता के सामने हुमायूं कबीर बने चुनौती, AIMIM से किया गठबंधन,100 से ज्यादा सीटों पर उतारे मुस्लिम प्रत्याशी

Bengal Election 2026: ममता की पार्टी टीएमसी ने अपने सभी उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. 291 सीटों पर उतारे गए प्रत्याशियों में से करीब 18 प्रतिशत यानी कि कुल 47 सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं. जबकि ममता के सामने मुख्य रूप से चुनौती देने वाले दल ने एक भी मुस्लिमों को टिकट नहीं दिया है.
Mamata Banerjee Humayun Kabir Bengal Election

ममता बनर्जी को हुमायूं कबीर ने दी टेंशन

Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल सत्ता में भले ही ममता बनर्जी ने पिछले 15 सालों से राज किया हो, लेकिन इस बार स्थिति कुछ अलग हो सकती है. क्योंकि बंगाल के मुस्लिम वोटर्स, जो टीएमसी के कोर मतदाता माने जाते थे, इस बार उन वोटरों को लुभाने के लिए हुमायूं कबीर भी अपनी नई पार्टी बनाकर चुनावी मैदान में हैं. हुमायूं कबीर का दावा है कि मुस्लिम वोटर इस बार टीमसी के साथ नहीं, बल्कि हुमायूं कबीर के साथ जाएंगे. अगर ऐसा हुआ, तो टीएमसी के लिए फिर से सत्ता में वापसी करना बहुत बड़ी चुनौती होगी. यहां जानें किस दल ने कितने मुस्लिमों को चुनावी मैदान में उतारा है.

ममता की पार्टी टीएमसी ने अपने सभी उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. 291 सीटों पर उतारे गए प्रत्याशियों में से करीब 18 प्रतिशत यानी कि कुल 47 सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं. जबकि ममता के सामने मुख्य रूप से चुनौती देने वाले दल ने एक भी मुस्लिमों को टिकट नहीं दिया है. जबकि वहीं हुमायूं कबीर की पार्टी, जो पहले बार चुनाव लड़ रही है, उसने अभी तक करीब 100 से ज्यादा मुस्लिम उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारकर ममता की मुश्किलें खड़ी कर दी हैं.

100 से ज्यादा मुस्लिमों को दिया टिकट

बंगाल विधानसभा चुनाव इस बार काफी दिलचस्प हो गया है. मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले पूर्व टीएमसी नेता हुमायूं कबीर ने 100 से ज्यादा मुस्लिमों को टिकट देकर चुनावी मैदान में उतारा है. इतना ही नहीं हुमायूं कबीर ने असदुद्दीन की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुसलमीन (AIMIM) से गठबंधन भी कर लिया है. इस गठबंधन ने ममता के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है.

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क्या है मुस्लिम समीकरण?

बंगाल में करीब 100 से ज्यादा ऐसी सीटें हैं, जहां पर मुसलमान मतदाता हार-जीत तय करते हैं. अभी तक टीएमसी को एकतरफा वोट मुसलमानों का मिलता रहा है, लेकिन इस बार हुमायूं कबीर ने चिंता खड़ी कर दी. मुसलमान वोटर्स टीएमसी के कोर मतदाता माने जाते रहे हैं. यही वजह रही है कि ममता बनर्जी ने मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर हिंदुओं को भी चुनावी मैदान में उतारकर जीत दर्ज की है.

ममता को टेंशन

बंगाल में मुस्लिम आबादी की बात करें, तो कोई फाइनल आंकड़ा नहीं है, लेकिन एक अनुमान के मुताबिक करीब 27 प्रतिशत मुस्लिम वोटर्स हैं, जो बंगाल की सत्ता में अहम रोल निभाते हैं. कुछ ऐसे भी जिले हैं, जहां मुस्लिमों की जनसंख्या काफी ज्यादा है. जैसे मुर्शिदाबाद- 66.3%, मालदा- 51.3% , उत्तर दिनाजपुर- 50% , बीरभूम- 37%, दक्षिण 24 परगना- 35.5%, नादिया- 26.7% मुस्लिम बाहुल्य जिले हैं. इन जिलों में ज्यादातर मुस्लिम प्रत्याशी ही चुनाव जीतते हैं. परिणाम चाहे जो भी हो, लेकिन हुमायूं कबीर ने 100 से ज्यादा मुस्लिम उम्मीदवारों को उतारकर ममता के लिए नई टेंशन दे दी है.

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