यह तो मांस नोचने जैसा…, तलाक की याचिका पर पत्नी ने मांगा मेंटिनेंस तो कोर्ट ने लगाई फटकार, जानें क्या है पूरा मामला
हाईकोर्ट
MP High Court: मध्य प्रदेश के हाई कोर्ट ने एक अनोखा फैसला सुनाया है. महिला ने पति से तलाक लेने का केस लगाया था. इस दौरान उसने पति से खर्च की मांग की थी. जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने साफ कहा कि महिला पहले से ही इतना कमाती है कि वह अपना घर काफी अच्छे से चला सकती है. हाई कोर्ट ने महिला के मेंटिनेंस मांगने को गलत बताया है. जानें कोर्ट ने क्या कहा?
हाई कोर्ट के जस्टिस विवेक जैन ने मामले की सुनवाई करते हुए अंग्रेजी साहित्यकार शेक्सपीयर के प्रसिद्ध नाटक ‘मर्चेंट ऑफ वेनिस’ के एक डॉयलाग का उदाहरण दिया और कहा कि यह तो उसी तरह है जैसे किसी के शरीर से मांस का टुकड़ा मांग लिया जाए. उन्होंने कहा कि कोर्ट इसकी इजाजत नहीं दे सकती है. क्योंकि महिला पहले से ही अच्छा कमा रही है और उसके पास रख-रखाव के लिए कोई बच्चा भी नहीं है. महिला की आय करीब 1 लाख रुपए महीना है, जो उसके खर्च के लिए पर्याप्त है.
2022 में हुई थी शादी
कोर्ट ने महिला के पक्ष को सुना और सख्त रुख अपनाते हुए मेंटिनेंस देने से मना कर दिया. बता दें, दंपति का विवाद 4 नवंबर 2022 को हुआ था, लेकिन वे शादी के कुछ ही महीनों बाद दोनों अलग रहने लगे. इस दौरान पति ने कोर्ट में तलाक के लिए याचिका लगाई थी. पत्नी ने भी कोर्ट से मांग की थी कि जब तक फैसला नहीं हो जाता. हमें मेंटिनेंस दिया जाए. जिस पर कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए मेंटिनेंस देने से मना कर दिया है.
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कोर्ट ने मेंटिनेंस देने से किया इनकार
फैमिली कोर्ट ने साफ कहा कि महिला की आय पर्याप्त है और उनके पास कोई बच्चा भी नहीं है. इसलिए मुआवजा नहीं बनता है. इसके बाद जब मामला हाई कोर्ट पहुंचा तो जहां महिला पहले 20 लाख कमाने की बात कही थी, तो वहीं अब वह 14 लाख रुपए सालाना कमाने की बात कहने लगी. इसके बावजूद कोर्ट ने कहा कि अगर 14 लाख रुपए भी आय मान लिया जाए, तो भी आय पर्याप्त है. हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को सही माना और बरकरार रखा.