MP News: मई में सिर्फ दो दिन शहनाइयों की गूंज, फिर लंबे समय तक थम जाएंगे शादी-ब्याह, जानिए क्या है वजह

MP News: दो तारीखों पर शहरों में बड़ी संख्या में विवाह समारोह आयोजित होने की संभावना जताई जा रही है और अनुमान है कि केवल इन दो दिनों में ही 300 से अधिक शादियां संपन्न होंगी.
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सांकेतिक तस्‍वीर

MP News: देशभर में इस समय शादी-विवाह का माहौल बना हुआ है, लेकिन मई महीने में वैवाहिक समारोहों की रौनक केवल दो दिनों तक ही सीमित रहने वाली है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस महीने 13 और 14 मई को ही विवाह के लिए शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं. इन दो तारीखों पर शहरों में बड़ी संख्या में विवाह समारोह आयोजित होने की संभावना जताई जा रही है और अनुमान है कि केवल इन दो दिनों में ही 300 से अधिक शादियां संपन्न होंगी.

14 मई के बाद लग जाएगा विराम

14 मई के बाद अधिकमास शुरू होने जा रहा है, जिसके चलते विवाह समेत सभी मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा. पंडितों का कहना है कि अब अगला विवाह मुहूर्त सीधे 19 जून से प्रारंभ होगा. इस अवधि में शादी, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्य नहीं किए जाएंगे.

तीन कारणों से प्रभावित रहेंगे विवाह मुहूर्त

ज्योतिष विशेषज्ञों के मुताबिक इस वर्ष मई से दिसंबर तक कई कारणों से विवाह मुहूर्त प्रभावित रहेंगे. सबसे पहले ज्येष्ठ अधिकमास रहेगा, उसके बाद गुरु तारा अस्त होगा और फिर देवशयनी एकादशी व चतुर्मास शुरू होने से लंबे समय तक विवाह समारोहों पर रोक जैसी स्थिति बनी रहेगी.

अधिकमास का धार्मिक महत्व

विक्रम संवत 2083 के अनुसार ज्येष्ठ अधिकमास 17 मई से 15 जून तक रहेगा. हिंदू मान्यताओं में इस समय को पूजा-पाठ, दान और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है, लेकिन विवाह जैसे मांगलिक कार्य इस दौरान नहीं किए जाते. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार विवाह मुहूर्त तय करते समय सूर्य संक्रांति, गुरु और शुक्र तारे की स्थिति का विशेष ध्यान रखा जाता है. कुछ राशियों में सूर्य संक्रांति के समय विवाह करना शुभ नहीं माना जाता.

चंद्र और सौर गणना का अंतर

हिंदू पंचांग चंद्रमा की गति पर आधारित होता है, जबकि अंग्रेजी कैलेंडर सूर्य गणना के अनुसार चलता है. दोनों की गणना में हर वर्ष लगभग 11 दिनों का अंतर आता है. यही अंतर तीन वर्षों में करीब एक महीने के बराबर हो जाता है. इसी संतुलन को बनाए रखने के लिए हर तीन साल में एक अतिरिक्त चंद्र मास जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है. इस अवधि में दान-पुण्य, उपवास, विष्णु सहस्रनाम पाठ और धार्मिक साधना का विशेष महत्व माना गया है.

जुलाई के बाद फिर लंबा इंतजार

ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि जुलाई में भी विवाह के लिए बहुत सीमित समय रहेगा. पुरुषोत्तम मास और कर्क संक्रांति के बाद भड़ली नवमी आने के कारण उस दिन भी विवाह नहीं होंगे. 19 जून से 12 जुलाई के बीच कुल 18 दिनों तक ही विवाह मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे. इसके बाद 16 जुलाई से 8 अगस्त तक गुरु तारा अस्त रहेगा. वहीं 25 जुलाई से 20 नवंबर तक देवशयनी एकादशी और चतुर्मास के चलते विवाह समारोहों पर रोक रहेगी.

इन तारीखों पर होंगे विवाह

इस वर्ष विवाह के लिए मई में 13 और 14 तारीख शुभ मानी गई है. जून में 19 से 29 जून तक लगातार कई मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे. जुलाई में 1, 2, 6, 7, 8, 11 और 12 जुलाई को विवाह किए जा सकेंगे. इसके बाद नवंबर में 20, 21, 22, 24, 25, 26 और 30 नवंबर को शुभ मुहूर्त रहेंगे. दिसंबर में 1 से 6 दिसंबर और फिर 9 से 12 दिसंबर तक विवाह के लिए अनुकूल तिथियां उपलब्ध रहेंगी.

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