5 साल की आर्या और 6 साल के धैर्य ने बढ़ायी प्रदेश की शान, माइनस तापमान में पूरा किया हिमाचल का कठिन ट्रैक

MP News: 5 साल की आर्या और शहर के ही 6 वर्षीय धैर्य ने जुनून एडवेंचर टीम के साथ हिमाचल प्रदेश के बेहद कठिन मंजनी टॉप ट्रैक को सफलतापूर्वक पूरा किया.
5-year-old Arya and 6-year-old Dhairya went trekking in sub-zero temperatures.

माइनस टेंपरेचर में 5 साल की आर्य और 6 वर्षीय धैर्य ने की ट्रेकिंग

MP News: सपने अगर बड़े हों और उन्हें पूरा करने का जज्बा मजबूत हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती. ऐसी ही एक हौसले की अनोखी कहानी राजधानी भोपाल के बागमुगालिया इलाके से सामने आई है. क्षेत्र में रहने वाली महज 5 साल की आर्या और शहर के ही 6 वर्षीय धैर्य ने जुनून एडवेंचर टीम के साथ हिमाचल प्रदेश के बेहद कठिन मंजनी टॉप ट्रैक को सफलतापूर्वक पूरा किया. करीब 3600 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचने वाले इस ट्रैक में सबसे खास बात यह रही कि दोनों बच्चों ने माइनस तापमान, तेज ठंडी हवाओं और कम ऑक्सीजन जैसी कठिन परिस्थितियों का डटकर सामना किया. इसके बावजूद उनका उत्साह और हौसला पूरे सफर में कायम रहा.

आर्या ने सुनाई अपनी ट्रैकिंग की कहानी

ट्रैक पूरा करने के बाद आर्या ने मासूमियत भरे अंदाज में बताया कि चढ़ाई के दौरान उसे थकान जरूर महसूस हुई, लेकिन पूरा सफर उसके लिए बेहद मजेदार रहा. मुस्कुराते हुए वह अपनी यात्रा के अनुभव साझा करती रही. आर्या ने बताया कि ट्रैकिंग के दौरान जंगली जानवरों का डर जरूर लगा, लेकिन उसने खुद को संभाला और लगातार आगे बढ़ती रही. खास बात यह रही कि चढ़ाई के दौरान उसकी गति काफी अच्छी रही, जिसने टीम के बाकी सदस्यों को भी हैरान कर दिया.

पिता बोले- बेटी को प्रकृति के करीब ले जाना था

आर्या के पिता हिमांशु सोनी, जो पेशे से आर्किटेक्ट हैं, ने बताया कि इस ट्रैक के पीछे सिर्फ एडवेंचर नहीं, बल्कि एक खास सोच थी. उनका उद्देश्य बेटी को बचपन से ही प्रकृति के करीब लाना था. उन्होंने कहा कि आर्या को प्रेरित करने के लिए उसे मंजनी टॉप पर पहुंचकर स्नोमैन बनाने का लक्ष्य दिया गया था. यही बात उसके मन में बैठ गई और पूरे ट्रैक के दौरान उसके लिए प्रेरणा का कारण बनी रही. उन्होंने बताया कि वे पहले भी कई ट्रैकिंग अभियान कर चुके हैं और अनुभवी टीम के साथ होने की वजह से उन्हें भरोसा था कि बच्चे सुरक्षित तरीके से प्रकृति का अनुभव ले पाएंगे.

मानसिक मजबूती ने बनाया आर्या को खास

ट्रैकिंग से पहले आर्या की तैयारी भी काफी दिलचस्प रही. उसके पिता ने बताया कि एक दिन उसने खुद ही घर से अपने स्कूल तक करीब 7 किलोमीटर पैदल चलने की जिद कर ली थी. कई बार उसे गोद में लेने की कोशिश की गई, लेकिन उसने मना कर दिया और पूरी दूरी खुद तय की. पिता का कहना है कि आर्या ने खुद को मानसिक रूप से काफी मजबूत बनाया है और यही वजह रही कि ट्रैक के दौरान उसका आत्मविश्वास लगातार बना रहा और वह किसी भी चुनौती से नहीं घबराई.

धैर्य ने भी दिखाया शानदार आत्मविश्वास

शहर के बागमुगालिया क्षेत्र की रहने वाली आर्या के साथ 6 वर्षीय धैर्य ने भी इस कठिन ट्रैकिंग अभियान में अपने साहस और उत्साह से सभी को प्रभावित किया. छोटी उम्र में जिस आत्मविश्वास और ऊर्जा के साथ उसने पूरा ट्रैक पूरा किया, उसने वहां मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. धैर्य का जोश और रोमांच को लेकर उसका नजरिया यह दिखाता है कि उसने इस सफर को किसी चुनौती की तरह नहीं, बल्कि एक यादगार अनुभव की तरह अपनाया.

बच्चों को प्रकृति से जोड़ना जरूरी

धैर्य के पिता राहुल कौशल का कहना है कि बच्चों को सिर्फ घर और कॉलोनी की सीमित दुनिया तक सीमित नहीं रखना चाहिए. उनका मानना है कि प्रकृति के बीच समय बिताने से बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास बेहतर होता है. जंगल, पहाड़ और खुले वातावरण से जुड़ाव बच्चों को जीवन के वास्तविक अनुभवों से परिचित कराता है और उन्हें भीतर से मजबूत बनाता है.

नियमित एक्टिविटी ने बढ़ाई फिटनेस

उन्होंने बताया कि धैर्य के लिए किसी विशेष या कठिन ट्रेनिंग का सहारा नहीं लिया गया. नियमित साइकिलिंग और सुबह-शाम वॉक उसकी दिनचर्या का हिस्सा रही. इसी निरंतर अभ्यास ने उसकी फिटनेस को मजबूत किया. हालांकि, छोटे बच्चों को रोजाना प्रेरित बनाए रखना आसान नहीं होता, लेकिन धीरे-धीरे धैर्य ने इस एक्टिव लाइफस्टाइल को खुद अपनाना शुरू कर दिया.

माइनस तापमान में भी नहीं टूटा हौसला

ट्रैकिंग के दौरान मौसम लगातार चुनौती बनकर सामने आया. ऊंचाई बढ़ने के साथ तापमान शून्य से नीचे पहुंच गया और ठंडी हवाओं ने रास्ता और कठिन बना दिया. इसके बावजूद आर्या और धैर्य ने हिम्मत नहीं हारी और पूरे आत्मविश्वास के साथ मंजनी टॉप तक पहुंचकर अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और साहस का शानदार परिचय दिया.

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