MP News: बीच रास्ते में खराब हुई 108 एंबुलेंस, गाड़ी में ही करानी पड़ी डिलीवरी, जच्चा-बच्चा की जान पर बन आया खतरा
एंबुलेंस में महिला की डिलीवरी
रिपोर्ट – अंकित बड़ोले, खरगोन
MP News: खरगोन जिले में एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही सामने आई है, जहां एक प्रसूता को लेकर आ रही 108 एंबुलेंस आधी रात को बीच रास्ते में खराब हो गई. आदिवासी ग्राम जमानियापानी निवासी संजूबाई पति करण को प्रसव पीड़ा के चलते 108 एंबुलेंस से जिला अस्पताल ले जाया जा रहा था. इस दौरान बिस्टान के अनकवाड़ी पुल के पास रात करीब 12 बजे एंबुलेंस खराब हो गई.
इस दौरान एंबुलेंस में सवार गर्भवती महिला को अत्यधिक प्रसव पीड़ा होने लगी और बच्चे का सिर बाहर आने लगा, जिससे जच्चा-बच्चा दोनों की जान पर खतरा पैदा हो गया. एंबुलेंस में मौजूद आशा कार्यकर्ता भावना सिसोदिया ने तत्काल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बिस्टान को इसकी सूचना दी. सूचना मिलते ही बिस्टान स्वास्थ्य केंद्र से नर्सिंग ऑफिसर नेहा कदम मौके पर पहुंचीं. उन्होंने अपनी सूझबूझ और तत्परता से खराब एंबुलेंस के भीतर ही महिला का सुरक्षित प्रसव कराया. प्रसव के बाद दूसरी एंबुलेंस की मदद से जच्चा-बच्चा को खरगोन जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया. फिलहाल मां और नवजात दोनों स्वस्थ हैं. यह घटना रविवार रात करीब 12 बजे की है.
परिजनों और ग्रामीणों ने नर्सिंग ऑफिसर की सराहना की
प्रसव के बाद खरगोन जिला अस्पताल पहुंचे परिजनों ने बताया कि अगर समय पर आशा कार्यकर्ता भावना सिसोदिया तत्काल बिस्टान अस्पताल फोन करके नर्सिंग ऑफिसर को नहीं बुलातीं, तो बड़ी अनहोनी हो सकती थी. नर्सिंग ऑफिसर नेहा कदम ने आधी रात को समय पर पहुंचकर एंबुलेंस में ही सुरक्षित डिलीवरी करवा कर मां और बच्चे दोनों की जान बचाई है. उनका यह कार्य सराहनीय है.
108 एंबुलेंस की व्यवस्था और रखरखाव पर उठे बड़े सवाल
मध्य प्रदेश सरकार स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर नजर आती है, ऐसे में आदिवासी बहुल क्षेत्र में इनकी तस्वीर कुछ और ही नजर आती है. जो 108 एंबुलेंस सुविधा मरीजों को तत्काल राहत पहुंचाने के लिए बनाई गई है, वह रखरखाव के अभाव में कहीं न कहीं दम तोड़ती नजर आती है. समय रहते अगर मौके पर नर्सिंग ऑफिसर नहीं पहुंचतीं, तो मां और बच्चे दोनों की जान भी जा सकती थी. यह घटना एक बार फिर 108 एंबुलेंस सेवा की व्यवस्था और रखरखाव पर बड़े सवाल खड़े कर रही है.
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