Mauganj News: मऊगंज में KYC नहीं तो DSC बंद! पंचायत विकास पर ताला, मऊगंज कलेक्टर पर टिकी निगाहें

Mauganj News: मऊगंज में यह चर्चा जोरों पर है कि केवाईसी का लक्ष्य पूरा कराने के लिए विकास कार्यों को ही हथियार बना लिया गया है. पंचायतों की डीएससी बंद होते ही निर्माण कार्य, मजदूरी भुगतान और विभिन्न योजनाओं की प्रक्रियाएं प्रभावित हो जाती हैं.
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मऊगंज में DSC बंद

Mauganj News: मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में इन दिनों एक ऐसा प्रशासनिक सिस्टम चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसने पंचायतों के विकास कार्यों पर ही ब्रेक लगा दिया है. आरोप है कि जिन ग्राम पंचायतों में केवाईसी (KYC) का लक्ष्य 100 प्रतिशत पूरा नहीं हो रहा, उनकी डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) बंद कर दी जा रही है. नतीजा यह है कि पंचायतों के भुगतान, निर्माण कार्यों की स्वीकृति और अन्य महत्वपूर्ण विकास कार्य ठप पड़ने लगे हैं. सवाल यह है कि आखिर केवाईसी का दबाव बनाकर विकास कार्यों को रोकने का अधिकार किसने दिया.

ऑनलाइन प्रक्रिया फिर पंचायतों पर दबाव क्यों?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब केवाईसी की अधिकांश प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से पूरी की जा रही है और आम नागरिक एमपी ऑनलाइन तथा सीएससी केंद्रों के जरिए यह कार्य कर रहे हैं, तो फिर ग्राम पंचायतों पर 100 प्रतिशत लक्ष्य पूरा करने का दबाव क्यों बनाया जा रहा है. पंचायत प्रतिनिधियों और कर्मचारियों का कहना है कि उनका काम केवल सत्यापन और सहयोग तक सीमित है, लेकिन लक्ष्य पूरा न होने की सजा पूरे पंचायत तंत्र को दी जा रही है.

विकास कार्यों पर लगा ब्रेक

एक तरफ भीषण गर्मी से लोग परेशान हैं, वहीं कुछ ही दिनों में मानसून की दस्तक होने वाली है. ऐसे समय में ग्राम पंचायतों द्वारा नालियों की सफाई, जल निकासी व्यवस्था, सड़क मरम्मत और अन्य जरूरी कार्य कराए जाते हैं ताकि बरसात में ग्रामीणों को परेशानी न हो. लेकिन डीएससी बंद होने से भुगतान और प्रशासनिक प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं. यदि यही स्थिति बनी रही तो बरसात के दौरान जलभराव, गंदगी और अन्य समस्याओं का खामियाजा सीधे ग्रामीणों को भुगतना पड़ सकता है.

विकास रोककर लक्ष्य हासिल करने की कोशिश?

मऊगंज में यह चर्चा जोरों पर है कि केवाईसी का लक्ष्य पूरा कराने के लिए विकास कार्यों को ही हथियार बना लिया गया है. पंचायतों की डीएससी बंद होते ही निर्माण कार्य, मजदूरी भुगतान और विभिन्न योजनाओं की प्रक्रियाएं प्रभावित हो जाती हैं. सवाल यह है कि क्या किसी योजना का लक्ष्य पूरा कराने के लिए पूरे गांव के विकास को रोक देना उचित है. क्या प्रशासनिक दबाव का बोझ आम ग्रामीणों और पंचायतों पर डालना न्यायसंगत है.

मऊगंज में सिस्टम बड़ा या जनहित?

मऊगंज जिला पहले भी कई प्रशासनिक विवादों को लेकर सुर्खियों में रहा है. अब केवाईसी के नाम पर पंचायतों की डीएससी बंद किए जाने का मामला नए सवाल खड़े कर रहा है. यदि केवाईसी अभियान जरूरी है तो इसके लिए जनजागरूकता, विशेष शिविर और तकनीकी सहायता का रास्ता अपनाया जाना चाहिए, न कि विकास कार्यों को रोककर दबाव बनाने का. आखिर विकास कार्यों पर ताला लगाकर किसका भला हो रहा है.

अब कलेक्टर के फैसले पर टिकी निगाहें

पूरा मामला अब जिला प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़ा है. लाखों ग्रामीणों की नजरें मऊगंज कलेक्टर पर टिकी हुई हैं. लोगों को उम्मीद है कि कलेक्टर इस विषय को गंभीरता से संज्ञान में लेकर पंचायतों की बंद डीएससी को बहाल कराने और विकास कार्यों को फिर से गति देने की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे. बरसात से पहले यदि स्थिति नहीं सुधरी तो इसका सीधा असर गांवों की व्यवस्थाओं और आम जनता के जीवन पर पड़ सकता है.

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बड़ा सवाल

यदि केवाईसी का लक्ष्य पूरा नहीं होता तो जिम्मेदारी तय की जा सकती है, लेकिन क्या पूरे गांव के विकास कार्य रोक देना समाधान है. आखिर पंचायतों की डीएससी बंद करने का आदेश किस स्तर से जारी हो रहा है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है. मऊगंज की जनता अब यही जानना चाहती है कि सिस्टम का कानून बड़ा है या ग्रामीणों का हित. आने वाले दिनों में इसका असर जमीन पर साफ दिखाई दे सकता है.

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