देशी ठेकों पर बिकती रही ‘मौत की बोतलें’! मुरैना में एक्सपायरी के बाद भी आबकारी विभाग ने जारी की 260 पेटी
मुरैना में एक्सपायरी के बाद भी शराब की बोतलें जारी कर दीं.
Input- मनोज शर्मा
MP News: मुरैना में आबकारी विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है. जिले के दो प्रमुख शराब ठेकों पर एक्सपायरी देशी शराब पहुंचने और उसकी बिक्री होने का मामला उजागर हुआ है. आरोप है कि आबकारी अधिकारी जितेंद्र गुर्जर ने बिना जांच-पड़ताल किए दो अलग-अलग परमिट जारी कर कुल 260 पेटी देशी शराब रिलीज कर दी, जबकि शराब की वैधता अवधि समाप्त हो चुकी थी.
बची शराब को प्रशासन ने सील किया
जानकारी के अनुसार, 9 जून को स्टेशन रोड स्थित दुकान क्रमांक-2 के लिए 200 पेटी देशी शराब का परमिट जारी किया गया. शराब की मेन्युफैक्चरिंग 25 अप्रैल 2025 की थी और उपलब्ध जानकारी के अनुसार उसकी वैधता अवधि समाप्त हो चुकी थी. इसके बावजूद शराब ठेके तक पहुंची और 14 जून तक बड़ी मात्रा में बिक्री भी हो गई.
मामला यहीं नहीं रुका. 12 जून को अंबाह रोड स्थित दुकान क्रमांक-1 के लिए फिर 60 पेटी शराब का परमिट जारी कर दिया गया. यह खेप भी कथित रूप से एक्सपायरी हो चुकी थी. कुछ स्टॉक बिकने के बाद जब मामला अधिकारियों के संज्ञान में आया तो विभाग में हड़कंप मच गया. आनन-फानन में कार्रवाई करते हुए बची हुई शराब को सील कर दिया गया.
आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि छैरा शराब त्रासदी के बाद शराब की गुणवत्ता और निगरानी को लेकर कई सख्त नियम लागू किए गए थे, फिर भी एक्सपायरी शराब कैसे गोदाम से निकलकर ठेकों तक पहुंच गई और कई दिनों तक बिकती रही? इससे आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
अब यह जांच का विषय है कि एक्सपायरी शराब की बिक्री से कितने उपभोक्ता प्रभावित हुए, जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी और इस पूरे मामले में किस स्तर पर लापरवाही बरती गई. जिले में इस खुलासे के बाद शराब कारोबार और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है.
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