दमोह: 10 दिन पहले उजाड़ा सिंदूर, अब सिस्टम के आगे बेबस हुई विधवा, एंबुलेंस न मिलने पर बस स्टॉप पर हुआ प्रसव
बस स्टॉप पर हुआ प्रसव
Damoh: मध्य प्रदेश के दमोह से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खडे़ कर दिए हैं. मामला जिले की जबेरा तहसील की माला ग्राम पंचायत के नया गांव टोला का है. यहां पर प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला एम्बुलेंस का इंतजार करती रही लेकिन एंबुलेंस 108 पीड़िता का लेने नहीं पहुंची. इसके बाद जो हुआ वह आपको हैरान कर देगा.
किस्मत को कुछ और था मंजूर
प्रसव पीड़ा से जूझ रही कविता के परिजनों ने एंबुलेंस 108 को कॉल किया और समस्या बताई तो उन्हें बताया गया कि एंबुलेंस को पहुंचने में करीब आठ घंटे का समय लगेगा. लेकिन महिला के पास इतना समय नहीं था. कविता की पीड़ा को देखते हुए परिजन उसे ई-रिक्शा में लेकर अस्पताल के निकले, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था.
बैटरी हो गई डिस्चार्ज
जिस रिक्शे में परिजन कविता को लेकर अस्पताल जा रहे थे, रास्ते में बम्होरी बस स्टैंड के पास उसकी बैटरी डिस्चार्ज हो गई. इसके बाद महिला को पास में बने यात्री प्रतीक्षालय में बैठाया गया. परिजन करीब 1 घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार करते रहे. उधर कविता को प्रसव पीड़ा लगातार बढ़ने से पास के गांव की महिलाएं मदद के लिए पहुंच गई, और महिलाओं ने साड़ी का पर्दा बनाकर बस स्टॉप पर ही सुरक्षित प्रसव कराया.
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही
प्रतीक्षालय से महज 100 मीटर की दूरी पर बम्होरी का उप स्वास्थ्य केंद्र है, लेकिन वहां स्वास्थ्य विभाग का कोई स्टाफ उपलब्ध नहीं था. प्रसव के बाद बम्होरी सरपंच प्रतिनिधि रितेश राय ने अपने निजी वाहन से जच्चा-बच्चा को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रोंड पहुंचाने में मदद की. स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती जच्चा-बच्चा स्वस्थ हैं.
10 दिन पहले ही हुई थी मौत
सबसे ज्यादा हैरान कर देने वाली बात ये है कि जब कविता के बच्चे ने जम्म लिया तब उसके घर उसके पिता का गंगाजलि का कार्यक्रम चल रहा था. 10 दिन पहले ही कविता बाई (30) के पति रतन सिंह की आकाशीय बिजली गिरने से मौत हो गई थी. गंगाजलि के दौरान ही कविता को तेज प्रसव पीड़ा हुई तो परिजन आनन-फानन में उसे ई-रिक्शे से लेकर अस्पताल जा रहे थे.