बारिश की बेरुखी से सूखे की दहलीज पर विंध्य, कर्ज लेकर खरीदा बीज, एक्सपर्ट्स बोले- बरसात में देर हुई तो उत्पादन घटेगा

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि खरीफ फसलों की बुवाई के लिए शुरुआती बारिश बेहद महत्वपूर्ण होती है. यदि अगले कुछ दिनों तक अच्छी वर्षा नहीं हुई तो धान, सोयाबीन, मक्का, उड़द और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है.
Due to less rainfall, the farmers of Vindhya are worried about their crops drying up.

बारिश कम होने से विंध्य के किसानों को फसल सूखने का डर सता रहा है.

MP News: विंध्य अंचल में मानसून की बेरुखी अब किसानों के लिए सबसे बड़ा संकट बनती जा रही है. मऊगंज सहित रीवा, सीधी, सिंगरौली, सतना और आसपास के जिलों में खेत पूरी तरह तैयार हैं. किसानों ने समय पर जुताई कर ली है, खाद-बीज का इंतजाम कर लिया है और खरीफ सीजन की शुरुआत का इंतजार कर रहे हैं. लेकिन आसमान से बारिश की राहत नहीं मिलने के कारण खेत सूखे पड़े हैं और बुवाई का काम ठप हो गया है. हर सुबह किसान आसमान की ओर उम्मीद भरी नजरों से देखता है, लेकिन शाम तक मायूसी ही उसके हिस्से में आती है.

कर्ज लेकर खरीदे बीज, अब बढ़ रही चिंता

खरीफ की फसल किसानों के पूरे साल की आर्थिक रीढ़ मानी जाती है. अधिकांश किसानों ने बैंक, सहकारी समितियों और साहूकारों से कर्ज लेकर बीज, खाद और कृषि उपकरणों का इंतजाम किया है. लेकिन बारिश नहीं होने से यह निवेश फिलहाल खेतों तक नहीं पहुंच पा रहा है. समय निकलता जा रहा है और किसानों को डर सता रहा है कि यदि बुवाई में अधिक देरी हुई तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा. ऐसे में कर्ज चुकाना भी मुश्किल हो सकता है.

हर बूंद से जुड़ी है पूरे परिवार की उम्मीद

बारिश का इंतजार सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं है. किसान परिवारों की आजीविका, बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च, बैंक की किस्तें और पूरे साल की आर्थिक व्यवस्था इसी फसल पर टिकी होती है. गांवों में हर घर की निगाहें आसमान पर हैं. बारिश नहीं होने से किसान मानसिक तनाव में हैं और भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ती जा रही है.

विशेषज्ञों की चेतावनी, देर हुई तो घटेगा उत्पादन

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि खरीफ फसलों की बुवाई के लिए शुरुआती बारिश बेहद महत्वपूर्ण होती है. यदि अगले कुछ दिनों तक अच्छी वर्षा नहीं हुई तो धान, सोयाबीन, मक्का, उड़द और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है. इससे उत्पादन में कमी आएगी और किसानों की आय पर गंभीर असर पड़ेगा. बाद में बारिश होने पर भी शुरुआती नुकसान की पूरी भरपाई करना आसान नहीं होगा.

खेती ही नहीं, पूरे ग्रामीण अर्थतंत्र पर मंडरा रहा संकट

विंध्य की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि आधारित है. खेती प्रभावित होने का असर सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रहेगा. खेतों में काम करने वाले मजदूरों को रोजगार कम मिलेगा, खाद-बीज और कृषि उपकरणों का व्यापार प्रभावित होगा, मंडियों में आवक घटेगी और ग्रामीण बाजारों में खरीदारी की रफ्तार धीमी पड़ सकती है. यानी कमजोर मानसून पूरे ग्रामीण आर्थिक ढांचे पर असर डाल सकता है.

आसमान की ओर टिकी हैं लाखों उम्मीदें

फिलहाल विंध्य का किसान सिर्फ एक ही प्रार्थना कर रहा है कि आसमान मेहरबान हो जाए. समय पर अच्छी बारिश हुई तो खेतों में हरियाली लौटेगी, फसलें लहलहाएंगी और गांवों की रौनक वापस आएगी. लेकिन यदि मानसून ने और देर की तो सूखे जैसे हालात बन सकते हैं, जिसका असर आने वाले पूरे कृषि वर्ष पर देखने को मिलेगा.

बारिश की हर बूंद अब सिर्फ पानी नहीं, किसानों की जिंदगी है

विंध्य की धरती आज बादलों से सिर्फ बारिश नहीं मांग रही, बल्कि अपने भविष्य की सुरक्षा की गुहार लगा रही है. खेत इंतजार में हैं, किसान उम्मीद में हैं और पूरा अंचल आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठा है. अब सबकी निगाहें मानसून पर टिकी हैं, क्योंकि आने वाले कुछ दिन तय करेंगे कि इस साल खेतों में हरियाली होगी या किसानों की उम्मीदें फिर एक बार सूखी धरती में दफन हो जाएंगी.

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