MP में मच्छरों के आतंक से मंत्री भी परेशान, VIP इलाकों में हो रही फॉगिंग; आम आदमी कर रहे हैं इंतजार

वीआईपी आवासों पर फॉगिंग की तस्वीरों को लेकर राजनीति भी शुरू हो गई है. कांग्रेस का आरोप है कि पूरे शहर में नियमित फॉगिंग नहीं हो रही और जहां हो रही है वहां भी दवा की गुणवत्ता पर सवाल हैं. कांग्रेस का कहना है कि कई जगह मिट्टी के तेल के साथ मिलावटी दवा का इस्तेमाल किया जा रहा है.
Bhopal Municipal Corporation team fogging the bungalow of Minister Pratima Bagri.

मंत्री प्रतिमा बागरी के बंगले पर फॉगिंग करती भोपाल नगर निगम की टीम.

MP News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में इन दिनों मच्छरों का आतंक सिर्फ आम लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि मंत्री और वीआईपी भी इससे परेशान हैं. दिलचस्प बात यह है कि जहां शहर के कई इलाकों के लोग फॉगिंग का इंतजार कर रहे हैं, वहीं कुछ मंत्रियों के सरकारी आवासों के बाहर नियमित रूप से फॉगिंग होती दिखाई दे रही है. सवाल यह है कि क्या मच्छरों से बचाव में भी वीआईपी और आम जनता के लिए अलग-अलग व्यवस्था है?

मानसून के साथ डेंगू का खतरा बढ़ा

भोपाल में मानसून के साथ डेंगू का खतरा भी बढ़ने लगा है. इसी बीच राजधानी के वीआईपी इलाके से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिन्होंने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. हाल ही में पशुपालन विभाग वापस लिए जाने के बाद राज्य मंत्री लखन पटेल के पास सिर्फ आनंद विभाग बचा है, लेकिन उनके सरकारी आवास पर शाम होते ही मच्छरों को भगाने के लिए फॉगिंग मशीन पहुंच जाती है. इसी तरह राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के सरकारी आवास के बाहर भी रोजाना फॉगिंग कराई जा रही है.

कैमरे में कैद ये तस्वीरें दिखाती हैं कि मच्छरों के खिलाफ कार्रवाई वीआईपी इलाकों में तो नियमित है, लेकिन शहर के कई मोहल्लों के लोग अब भी फॉगिंग का इंतजार कर रहे हैं.

कांग्रेस का आरोप- मिलावट के साथ हो रही फॉगिंग

वीआईपी आवासों पर फॉगिंग की तस्वीरों को लेकर राजनीति भी शुरू हो गई है. कांग्रेस का आरोप है कि पूरे शहर में नियमित फॉगिंग नहीं हो रही और जहां हो रही है वहां भी दवा की गुणवत्ता पर सवाल हैं. कांग्रेस का कहना है कि कई जगह मिट्टी के तेल के साथ मिलावटी दवा का इस्तेमाल किया जा रहा है.

वहीं बीजेपी इन आरोपों को खारिज करते हुए कह रही है कि मानसून में मच्छरों की संख्या बढ़ना स्वाभाविक है और नगर निगम पूरे शहर में अभियान चला रहा है. बीजेपी का दावा है कि अलग-अलग वार्डों में लगातार फॉगिंग कराई जा रही है.

‘मोहल्लों तक कब पहुंचेगी फॉगिंग?’

कुछ साल पहले मध्य प्रदेश में डेंगू का खतरा इतना बढ़ गया था कि मुख्यमंत्री से लेकर स्वास्थ्य मंत्री तक लोगों से जागरूकता की अपील करने सड़कों पर उतरे थे. इस बार भी मानसून के साथ डेंगू के मामले बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि फॉगिंग मशीनें सिर्फ वीआईपी इलाकों तक सीमित रहेंगी या फिर आम लोगों के मोहल्लों तक भी समय पर पहुंचेंगी.

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