पत्नी पर बदचलनी का आरोप और बेटे से पल्ला झाड़ना पड़ा भारी, हाई कोर्ट ने खारिज की पति की तलाक याचिका

HC Rejects Character Allegation Divorce: झारखंड हाईकोर्ट ने एक तलाक के मामले में कड़ा फैसला सुनाया है. इस मामले में पति ने अपनी पत्नी पर बदचलनी का आरोप लगाते हुए बेटे से पल्ला झाड़ दिया था.
झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट

Husband Divorce Petition Rejected: झारखंड हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पति की ओर से दायर तलाक की याचिका खारिज कर दी. पति ने अपनी पत्नी पर क्रूरता और छोड़कर चले जाने का आरोप लगाते हुए तलाक मांगा था. लेकिन, अदालत ने कहा कि उपलब्ध सबूतों से ऐसा नहीं लगता कि पत्नी ने पति के साथ क्रूरता की. इसके उलट, रिकॉर्ड से यह सामने आया कि पति ने ही पत्नी और उसके बेटे के साथ अनुचित व्यवहार किया, उनकी जिम्मेदारी नहीं निभाई और पत्नी के चरित्र पर बेबुनियाद आरोप लगाए.

यह फैसला जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने सुनाया है. अदालत ने कहा कि पति अपने आरोपों को साबित करने में पूरी तरह फेल रहा है.

क्या था पूरा मामला?

झारखंड के रहने वाले कपल की शादी 25 जून 2008 को स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत हुई थी. हालांकि, साल 2009 से दोनों अलग-अलग रह रहे हैं. पति का कहना था कि शादी के कुछ समय बाद पत्नी ने उसके खिलाफ झूठा आपराधिक मामला दर्ज कराया, अपने मायके चली गई और फिर कभी वापस नहीं लौटी. उसका आरोप था कि पत्नी ने बिना किसी कारण उसे छोड़ दिया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया.

वहीं, पत्नी ने इन सभी आरोपों को गलत बताया है. उसने अदालत को बताया कि शादी से पहले पति ने शादी का वादा किया था, जिसके बाद वह गर्भवती हो गई. लेकिन, गर्भावस्था की जानकारी मिलने पर पति ने उससे दूरी बना ली और शादी करने से भी इनकार कर दिया. अप्रैल 2008 में उसने बेटे को जन्म दिया. बाद में परिवार के लोगों के हस्तक्षेप के बाद पति शादी के लिए तैयार हुआ और जून 2008 में दोनों की शादी हुई.

पत्नी ने लगाए गंभीर आरोप

पत्नी ने अदालत में कहा कि पति का व्यवहार उसके प्रति ठीक नहीं था. उसने यह भी आरोप लगाया कि पति के किसी अन्य महिला से संबंध थे. इसी कारण उसे ससुराल छोड़ना पड़ा था. पत्नी ने यह भी बताया कि इससे पहले पति ने वैवाहिक अधिकारों की बहाली के लिए भी मामला दायर किया था, लेकिन फैमिली कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया था. उस समय भी अदालत ने माना था कि पत्नी के अलग रहने के पीछे उचित कारण थे.

पत्नी ने अदालत से कहा कि यदि पति उसे सम्मान और इज्जत के साथ रखने को तैयार हो, तो वह अपने नाबालिग बेटे के साथ उसके साथ रहने के लिए तैयार है.

अदालत ने क्या कहा?

हाई कोर्ट ने कहा कि पति अपनी पत्नी के खिलाफ क्रूरता का कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका है. अदालत के अनुसार, पति की तरफ से बताए गए विवाद सामान्य वैवाहिक जीवन में होने वाले मतभेद थे, जिन्हें कानूनी रूप से क्रूरता नहीं माना जा सकता है.

इसके विपरीत, अदालत ने पाया कि पति ने अपने बेटे को अपना मानने से इनकार किया और पत्नी पर अनैतिक संबंध तथा बदचलनी जैसे गंभीर आरोप लगाए. अदालत ने कहा कि बिना सबूत किसी पति या पत्नी के चरित्र पर ऐसे आरोप लगाना उसकी गरिमा, सम्मान और प्रतिष्ठा पर गंभीर हमला है. कानून की नजर में यह मानसिक क्रूरता का गंभीर रूप माना जाता है.

अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड से ऐसा प्रतीत होता है कि वास्तविक क्रूरता पति की ओर से हुई, क्योंकि उसने पत्नी और बेटे की देखभाल नहीं की और पत्नी पर बेबुनियाद आरोप लगाए.

ये भी पढ़ें: सरकार से बातचीत नहीं करेंगे CJP नेता! जंतर मंतर पर हुई लाठीचार्ज से नाराजगी

ज़रूर पढ़ें