MP News: स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर MBBS इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन तेज, आज भोपाल में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल

MP News: स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग लंबित है और जब तक सरकार इस पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.
Strike by MBBS intern doctors

एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल

MP News: स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग को लेकर मध्य प्रदेश के एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है. राजधानी भोपाल में सोमवार यानी आज इंटर्न डॉक्टर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठेंगे.

उनका कहना है कि लंबे समय से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग लंबित है और जब तक सरकार इस पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. इस पूरे घटनाक्रम पर स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल कॉलेज प्रशासन की भी नजर बनी हुई है.

भूख हड़ताल से आंदोलन होगा तेज

इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर कई बार सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया. इसी कारण उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का रास्ता चुना है. राजधानी भोपाल में इस मुद्दे को लेकर सोमवार को विरोध-प्रदर्शन और तेज होने की संभावना है.

बाइक रैली निकालकर रखी मांग

शनिवार को प्रदेश के शासकीय और निजी मेडिकल कॉलेजों के एमबीबीएस इंटर्न्स और भावी इंटर्न्स ने भोपाल में जागरूकता बाइक रैली निकालकर अपनी मांग को प्रमुखता से उठाया. रैली हमीदिया अस्पताल से शुरू होकर भदभदा चौराहा तक पहुंची और फिर वापस हमीदिया अस्पताल में समाप्त हुई. प्रदर्शनकारियों ने प्रदेश में वर्तमान में मिलने वाले 14,337 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रतिमाह करने की मांग दोहराई.

सरकार को सौंपे जा चुके हैं ज्ञापन

इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि मध्य प्रदेश में मिलने वाला स्टाइपेंड देश के कई अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है, जबकि उनकी जिम्मेदारियां और कार्यभार समान हैं. उनका दावा है कि इस संबंध में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, वित्त मंत्री, चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री सहित चिकित्सा शिक्षा विभाग और वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को कई बार ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस फैसला या लिखित आश्वासन नहीं मिला है.

23 जुलाई से जारी है कार्य बहिष्कार

आंदोलनकारी इंटर्न्स के अनुसार, 23 जुलाई से कार्य स्थगित आंदोलन जारी है. इसके तहत ओपीडी, वार्ड और प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की नियमित सेवाओं का बहिष्कार किया जा रहा है. हालांकि मरीजों को परेशानी न हो, इसलिए आपातकालीन सेवाएं पहले की तरह संचालित की जा रही हैं. इंटर्न डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा.

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