सावन का पहला सोमवार आज, निकाली जाएगी बाबा महाकाल की पहली सवारी, जानें एक-एक जानकारी

Baba Mahakal Sawari: आज बाबा महाकाल नगर भ्रमण पर निकलेंगे, इसके लिए विशेष व्यवस्था की गई है. सवारी मार्ग का चौड़ीकरण किया गया है, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था ना हो. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष की गई है. सवारी की दौरान गंदगी ना फैले इसे लेकर भी ध्यान रखा गया है.
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बाबा महाकाल

Baba Mahakal Sawari: आज सावन का पहला सोमवार है. मध्य प्रदेश के विभिन्न शिवालयों में भक्तों का तांता लगा हुआ है. श्रद्धालु शिवलिंग का जल और दूध से अभिषेक के लिए कतार में दिखाई दे रहे हैं. उज्जैन और ओंकारेश्वर में भी रौनक दिखाई दे रही है. महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर ज्योर्तिलिंग के दर्शन के लिए देश-विदेश से लोग पहुंच रहे हैं. आज बाबा महाकाल की पहली राजसी सवारी निकाली जाएगी.

पहली सवारी के लिए विशेष व्यवस्था

आज बाबा महाकाल नगर भ्रमण पर निकलेंगे, इसके लिए विशेष व्यवस्था की गई है. सवारी मार्ग का चौड़ीकरण किया गया है, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था ना हो. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष की गई है. सवारी की दौरान गंदगी ना फैले इसे लेकर भी ध्यान रखा गया है. यात्री सुविधाओं जैसे पेयजल आदि का ख्याल रखा गया है. सुरक्षा पर विशेष तौर से नजर रखी जाएगी. इसके लिए बड़ी संख्या में पुलिसबल को तैनात किया गया है.

पहली सवारी का कार्यक्रम

पहली सवारी में बाबा महाकाल भगवान चंद्रमौलेश्वर के रूप में दर्शन देंगे.

  • दोपहर 3.30 बजे – भगवान चंद्रमौलेश्वर की पूजा-अर्चना
  • शाम 4 बजे – महाकाल मंदिर के मुख्य द्वार से पालकी रवाना
  • शाम 4.30 बजे – क्षिप्रा तट पर पूजा और अभिषेक
  • शाम 7.15 बजे – पालकी वापसी महाकाल मंदिर में होगी

सवारी का रूट क्या रहेगा?

सवारी महाकाल मंदिर के मुख्य द्वार से निकलकर गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी होते हुए रामघाट पहुंचेगी. रामघाट से रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, ढाबा रोड, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी चौराहा होते हुए फिर से मंदिर पहुंचेगी.

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इस बार कुल 6 सवारियां निकाली जाएंगी

श्रावण और भादो महीने में बाबा महाकाल की सवारी निकाली जाती है. सावन के चार और भाद्रपद महीने के दो सोमवार को बाबा की राजसी निकाली जाती है. इस बार कुछ 6 सावारियां निकाली जाएंगी. मान्यता है कि बाबा महाकाल प्रजा का हाल-चाल जानने और दर्शन देने के लिए सवारी पर निकलते हैं. बताया जाता है कि मराठा काल से बाबा अलग-अलग स्वरूपों में राजसी ठांठ-बांट के साथ निकलते हैं.

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