Kailash Vijayvargiya: मोहन कैबिनेट की बैठक से दूर कैलाश विजयवर्गीय, क्या है नाराजगी की वजह?
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Kailash Vijayvargiya: इंदौर: मध्य प्रदेश की मोहन सरकार में इन दिनों एक मंत्री की कैबिनेट बैठकों से दूरी को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हैं. नाम है सरकार के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का. पिछले चार-पांच महीनों में डेस्टिनेशन कैबिनेट को छोड़ दें तो नियमित कैबिनेट बैठकों में उनकी गैरमौजूदगी लगातार सवाल खड़े कर रही है.
11 अगस्त को भोपाल में हुई कैबिनेट बैठक में भी कैलाश विजयवर्गीय नजर नहीं आए. आखिर कैबिनेट की बैठकों से उनकी दूरी की वजह क्या है? क्या यह सरकार के प्रति किसी तरह का विरोध है या इसके पीछे कोई और वजह. सवाल इसलिए भी बड़ा है क्योंकि सरकार के भीतर कोई इस पर खुलकर बोलने को तैयार नहीं है.
कई कैबिनेट बैठकों में नहीं हुए शामिल
मोहन कैबिनेट के सबसे वरिष्ठ और प्रभावशाली मंत्रियों में शामिल कैलाश विजयवर्गीय की कैबिनेट बैठकों से दूरी अब सियासी चर्चा का विषय बन गई है. पिछले करीब चार-पांच महीनों में कई नियमित कैबिनेट बैठकों में उनकी गैरमौजूदगी दिखाई दी.
सरकार के अंदर से अलग-अलग दावे
कैलाश विजयवर्गीय की गैरमौजूदगी को लेकर सरकार के अंदर से अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं. मंत्री दिलीप जायसवाल का कहना है कि वे 11 अगस्त को खुद कैलाश विजयवर्गीय से मिले थे और कांग्रेस इस मामले में झूठ बोल रही है. हालांकि कैबिनेट बैठक की सामने आई तस्वीरों में दिलीप जायसवाल के साथ मंत्री कृष्णा गौर और लखन पटेल नजर आ रहे हैं, जबकि कैलाश विजयवर्गीय दिखाई नहीं दे रहे. दिलीप जायसवाल के बगल में मंत्री कृष्णा गौर और लखन पटेल नजर आ रहे हैं.
कांग्रेस ने अंदरूनी गुटबाजी से जोड़ा
वहीं कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को बीजेपी की अंदरूनी गुटबाजी से जोड़ दिया है. कांग्रेस प्रवक्ता विक्रम चौधरी का आरोप है कि सरकार के भीतर मंत्रियों की बात नहीं सुनी जा रही और काम नहीं हो रहे हैं. उनका दावा है कि कैलाश विजयवर्गीय ने सरकार के प्रति विरोध जताने का अपना अलग तरीका अपनाया है. भागीरथपुरा मामले में भी उनके रवैये को कांग्रेस इसी से जोड़ रही है.
किस तरह चल रहा विभाग का कामकाज ?
लेकिन सवाल सिर्फ कैबिनेट बैठक में मौजूदगी का नहीं है. कैलाश विजयवर्गीय के पास महत्वपूर्ण विभाग हैं. ऐसे में अगर वे लगातार कैबिनेट बैठकों से दूर हैं तो उनके विभागों का कामकाज किस तरह चल रहा है? यह सवाल भी उठ रहा है. क्या विभाग का काम राज्य मंत्री संभाल रहे हैं या मंत्री खुद नियमित रूप से विभागीय गतिविधियों की निगरानी कर रहे हैं?
वरिष्ठ पत्रकार का क्या कहना है ?
वरिष्ठ पत्रकार दिनेश गुप्ता का कहना है कि मंत्री निजी कार्यक्रमों में शामिल हों या नहीं, यह अलग विषय है. लेकिन मुख्यमंत्री को यह जरूर पता होना चाहिए कि उनके कैबिनेट के एक वरिष्ठ मंत्री नियमित बैठकों में क्यों शामिल नहीं हो रहे हैं.
तो सवाल अब सिर्फ इतना नहीं है कि कैलाश विजयवर्गीय कैबिनेट बैठक में क्यों नहीं पहुंचे. सवाल यह भी है कि लगातार सामने आ रही उनकी गैरमौजूदगी के पीछे आखिर वजह क्या है? क्या यह महज व्यस्तता है, निजी कार्यक्रम हैं या फिर सरकार के भीतर किसी तरह की नाराजगी और असहमति? सरकार के मंत्री जहां कांग्रेस के आरोपों को खारिज कर रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे बीजेपी की अंदरूनी गुटबाजी बता रहा है.
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