DUSU का हाई प्रोफाइल चुनावः लग्जरी गाड़ियों की लगी लाइनें, बड़े-बड़े वादों से चर्चा में इलेक्शन

DUDU Election: दिल्ली यूनिवर्सिटी के चुनाव में कैंपस की सड़कों से गुजरती पोर्श, बेंटले, डिफेंडर और फेरारी जैसी लक्जरी गाड़ियां सबका ध्यान अपनी ओर खींच रही हैं.
Delhi University election

DUSU का हाई प्रोफाइल चुनाव

Delhi University Election: देश की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी DUSU के चुनाव को देखकर ऐसा लगता है कि यहां का चुनाव लड़ना अब आम आदमी के बस की बात नहीं है. क्योंकि इस चुनाव में इतने पैसे खर्च हो जाते हैं कि उतना तो किसी विधायक और सांसद के चुनाव में खर्च नहीं होते हैं. महंगी-महंगी और लग्जरी गाड़ियों से ऐसे प्रचार किया जाता है. जैसे किसी देश का राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री का चुनाव हो. इस चुनाव में भी छात्रों से बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं. यहां जानते हैं DUSU चुनाव से जुड़ी सभी जानकारियां, जो आपको जानना जरूरी है.

दिल्ली यूनिवर्सिटी के चुनाव में कैंपस की सड़कों से गुजरती पोर्श, बेंटले, डिफेंडर और फेरारी जैसी लक्जरी गाड़ियां सबका ध्यान अपनी ओर खींच रही हैं. यह चुनाव केवल लग्जरी गाड़ियों, पोस्टर और बडे़-बड़े वादों तक ही सीमित नहीं है. छात्रों को रुझाने के लिए पिज्जा, बर्गर, छोले-भटूरे और समोसे भी बांटे जा रहे हैं. 18 सितंबर को यहां चुनाव होना है.

चुनावी मैदान में 20 प्रत्याशी

अगर दिल्ली यूनिवर्सिटी की बात करें, तो यह पर 91 कॉलेज, 16 संकाय और 86 विभाग हैं. जिसमें करीब 7 लाख से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं. चुनाव में कुल 20 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. कुल 4 पदों के लिए हो रहे चुनाव में 2.75 लाख मतदाता अपने मताधिकारों का इस्तेमाल करेंगे. अध्यक्ष पद के लिए 7, उपाध्यक्ष के लिए 5, सचिव के लिए 4 और संयुक्त सचिव के लिए 4 उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतरे हैं.

चकाचौंध भरा है दिल्ली यूनिवर्सिटी का चुनाव

दिल्ली यूनिवर्सिटी का चुनाव दूसरे यूनिवर्सिटी की अपेक्षा काफी अलग होता है, क्योंकि यहां का ज्यादातर चुनाव पैसों और दिखावे के दम पर लड़ा जाता है. इसीसिए दिल्ली यूनिवर्सिटी के चुनाव प्रचार में चकाचौंध भर भारी-भरकम अंदाज देखने को मिलता है. ऐसा नहीं है कि इस साल ही चुनाव में इतने पैसे खर्च हो रहे हैं. हर साल का यही हाल है.

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जनता का किन पर भरोसा, परिणाम के बाद होगा तय

चुनाव में एबीवीपी और एनएसयूआई के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है. इसके अलावा भी कई संगठन और निर्दलीय प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं. सभी प्रत्याशियों ने बड़े-बड़े चुनावी वादे किए हैं. एक छात्रा ने बताया कि चुनाव के समय प्रत्याशी झांसा देकर वोट ले जाते हैं. बाद में छात्रों को समस्या का सामना करना पड़ता है. पिछली बार के चुनाव में एक प्रत्याशी ने वोट के बदले हफ्ते भर की अटेंडेंस का वादा किया था, लेकिन वह अभी तक पूरा नहीं हुआ. इस बार के चुनाव में सत्या निकेतन के पीजी की बिल्डिंग गिरना भी मुद्दा बना हुआ है. अब देखना यह होगा कि छात्र किन पर अपना भरोसा जताते हैं.

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