जयंत से अलग राह? अखिलेश-राहुल के साथ सुनील सिंह! 2027 से पहले लोकदल की नई सियासी चाल
यूपी चुनाव से पहले मुलाकातों का दौर जारी
Sunil Singh Meets Opposition Leaders: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी के बीच पश्चिमी यूपी की राजनीति में लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह का नाम तेजी से चर्चा में आया है. सुनील सिंह ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की है. उन्होंने सपा-कांग्रेस के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है. लोकदल की ओर से करीब 35 विधानसभा सीटों पर तैयारी की बात कही गई है.
सुनील सिंह अपने लोकदल को पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह द्वारा 1979 में बनाए गए मूल लोकदल की राजनीतिक विरासत से जोड़ते हैं. उनका दावा है कि उनकी पार्टी किसान और ग्रामीण मुद्दों की उसी राजनीति को आगे बढ़ा रही है.
चौधरी सुनील सिंह का जन्म 1 जनवरी 1971 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुआ था. उन्होंने बीटेक और एमबीए की पढ़ाई की है. उनका राजनीतिक परिवार से संबंध रहा है. उनके पिता चौधरी राजेंद्र सिंह उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और विधायक रह चुके हैं. राजेंद्र सिंह को मुलायम सिंह यादव और चौधरी चरण सिंह के करीबी नेताओं में गिना जाता था.
मुलायम के दौर में रहे MLC
सुनील सिंह का समाजवादी पार्टी के पुराने नेतृत्व से भी जुड़ाव रहा है. वे मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्री रहने के दौरान विधान परिषद सदस्य रह चुके हैं.2017 में सपा के भीतर मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के बीच विवाद के समय उन्होंने मुलायम सिंह का समर्थन किया था.
अब वही सुनील सिंह अखिलेश यादव के साथ राजनीतिक तालमेल की कोशिश करते नजर आ रहे हैं.उन्होंने 2027 में अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने और 2029 में राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने की बात भी कही है.
क्या 35 सीटों पर मिलेगी जगह?
लोकदल ने गठबंधन में करीब 35 सीटों की मांग रखी है, लेकिन सीट बंटवारे पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है.सपा-कांग्रेस और लोकदल के बीच बातचीत आगे बढ़ती है तो यह साफ होगा कि पार्टी को कितनी सीटें मिलती हैं.
वहीं, चुनावी रिकॉर्ड के लिहाज से लोकदल का आधार अभी सीमित रहा है.2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों के साथ 2024 के लोकसभा चुनाव में भी पार्टी का प्रदर्शन बड़े स्तर पर प्रभावशाली नहीं रहा.ऐसे में 2027 में सपा-कांग्रेस के साथ संभावित गठबंधन के जरिए लोकदल अपने राजनीतिक आधार को विस्तार देने की कोशिश कर रहा है.
पश्चिमी यूपी में आने वाले समय में किसान राजनीति, जाट वोट, चौधरी चरण सिंह की विरासत और सपा-कांग्रेस के गठबंधन जैसे मुद्दे चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बन सकते हैं.
ये भी पढ़ें:BJP के प्रदेश प्रभारियों का ऐलान, स्मृति को छत्तीसगढ़ बिप्लब देव को MP की जिम्मेदारी, देखें पूरी लिस्ट