GST की 57वीं बैठक में बड़ा फैसला: टैक्स अधिकारियों के अरेस्ट करने का अधिकार खत्म, रास्ते में ई-वे बिल चेकिंग पर रोक

नई दिल्ली. देश के व्यापारियों और कारोबारियों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है. दिल्ली में हुई जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक में कर प्रणाली को लेकर कई बड़े फैसले लिए गए हैं.

नई दिल्ली. देश के व्यापारियों और कारोबारियों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है. दिल्ली में हुई जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक में कर प्रणाली को लेकर कई बड़े फैसले लिए गए हैं. टैक्स डिपार्टमेंट के गिरफ्तारी के पुराने अधिकारों को खत्म करने से लेकर ई-वे बिल की रैंडम चेकिंग पर रोक और आईटीसी के दायरे को बढ़ाने जैसे कई बड़े निर्णय लिए गए हैं. आइए विस्तार से जानते हैं कि इस बैठक में क्या कुछ खास रहा और इसका कारोबारियों को कैसे सीधा फायदा मिलेगा… (57th GST Council Meeting Decisions)

केंद्र सरकार ने देश के व्यापारियों, उद्यमियों और आम नागरिकों को बड़ी राहत देते हुए जीएसटी प्रणाली में ऐतिहासिक सुधारों का ऐलान किया है. दिल्ली में संपन्न हुई जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक में टैक्स प्रक्रियाओं को बेहद आसान और पारदर्शी बनाने के लिए कई क्रांतिकारी कदम उठाए गए हैं. इन नए बदलावों को 1 अप्रैल 2027 से पूरे देश में लागू करने का लक्ष्य रखा गया है. इस बैठक में छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी भी शामिल हुए. (57th GST Council Meeting Decisions)

दशकों से चले आ रहे टैक्स डिपार्टमेंट के अरेस्ट (गिरफ्तारी) करने के अधिकार को समाप्त करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है. इसके अलावा अब रास्ते में कहीं भी टैक्स अधिकारियों द्वारा गाड़ियां रोककर ई-वे बिल चेक करने की व्यवस्था को खत्म कर दिया गया है. इससे लॉजिस्टिक्स आसान होंगे और चालकों तथा व्यापारियों को अनावश्यक परेशानी से मुक्ति मिलेगी.

व्यापारिक रजिस्ट्रेशन और टैक्स रिफंड की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए कई डीम्ड प्रोविजन्स जोड़े गए हैं, जिससे प्रक्रियाओं में लगने वाला समय कम होगा. कारोबारियों को ग्रुप इंश्योरेंस, केटरिंग और कैपिटल एक्सपेंडिचर पर भी अब इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ मिलेगा. इससे देश में उद्यमिता को और अधिक बढ़ावा मिलेगा.

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