Jabalpur: गर्भवती महिलाओं को दी जाती थीं एक्सपायरी दवाएं! बिना रजिस्ट्रेशन चल रहा था अस्पताल, प्रशासन ने किया सील
एक्सपायरी दवाओं को किया चेक
Jabalpur News: मध्य प्रदेश के जबलपुर में बेलखाड़ू के पास स्थित अश्वनी अस्पताल में जांच के दौरान बड़ी संख्या में एक्सपायरी दवाएं मिलने का मामला सामने आया है. मंगलवार शाम ड्रग इंस्पेक्टर ने पुलिस और ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) की मौजूदगी में अस्पताल में रखी दवाओं की जांच की. करीब एक घंटे तक चली कार्रवाई में 23 प्रकार की एलोपैथिक दवाएं मिलीं, जिनमें एक्सपायरी दवाएं भी शामिल थीं. टीम ने करीब 12 हजार रुपये मूल्य की दवाएं जब्त कर लीं.
बिना रजिस्ट्रेशन चल रहा था अस्पताल
प्रारंभिक जांच में पता चला कि अस्पताल का आवश्यक रजिस्ट्रेशन नहीं था. अधिकारियों के मुताबिक, अस्पताल संचालित करने वाली सरिता साहू के पास एलोपैथिक चिकित्सा की मान्य डिग्री भी नहीं थी. आरोप है कि वह बंगाल से प्राप्त डिप्लोमा के आधार पर लंबे समय से अस्पताल चला रही थीं और मरीजों का एलोपैथिक दवाओं से इलाज कर रही थीं.
युवक की मौत के बाद अस्पताल हुआ था सील
यह मामला 19 वर्षीय शेखर चौधरी की मौत के बाद सामने आया. घटना के बाद जिला प्रशासन ने अस्पताल को सील कर दिया था. मंगलवार को जांच के दौरान यहां बच्चों और गर्भवती महिलाओं के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाएं भी मिलीं. पुलिस पहले से ही युवक की मौत के मामले की जांच कर रही है.
पेट दर्द के इलाज के बाद बिगड़ी तबीयत
जानकारी के मुताबिक, बेलखाड़ू के भट्टा मोहल्ले में रहने वाले शेखर चौधरी को 2 अक्टूबर को अचानक तेज पेट दर्द हुआ था. परिजन उसे खैरी गांव स्थित अश्वनी अस्पताल लेकर पहुंचे. वहां सुबह तक उपचार कराने के बाद वे उसे घर ले आए. कुछ समय बाद शेखर के हाथ-पैरों में तेज जलन होने लगी, जिसके बाद परिजन उसे दोबारा अस्पताल ले गए. यहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.
इंजेक्शन और ग्लूकोज चढ़ाने के बाद मौत
समीर चौधरी की शिकायत पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की. जांच में सामने आया कि अस्पताल संचालिका सरिता साहू के कहने पर उनके सहयोगी सतीश साहू ने शेखर के हाथ और कमर में इंजेक्शन लगाए थे. अगले दिन उसे दोबारा इंजेक्शन दिया गया और ग्लूकोज की ड्रिप चढ़ाई गई. परिजनों का आरोप है कि ड्रिप चढ़ने के करीब आधे घंटे बाद शेखर की मौत हो गई.
ग्लूकोज की बोतल पर दर्ज थी एक्सपायरी डेट
घटनास्थल से मिली ग्लूकोज की बोतल पर नवंबर 2025 की एक्सपायरी डेट दर्ज थी. पुलिस ने बोतल, ड्रिप, निडिल, इंजेक्शन की खाली शीशी और दवाओं के रैपर जब्त किए थे. अब यह आशंका भी जांच के दायरे में है कि शेखर को चढ़ाई गई ड्रिप में मिलाया गया इंजेक्शन एक्सपायरी तो नहीं था. हालांकि, युवक की मौत की वास्तविक वजह और उसमें दवाओं की भूमिका की पुष्टि जांच रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी.
जांच के दौरान अस्पताल संचालिका नहीं पहुंचीं
ड्रग इंस्पेक्टर प्रवीण पटेल, बीएमओ डॉ. श्रीपति मिश्रा और बेलखाड़ू चौकी प्रभारी अमित मिश्रा की टीम ने अस्पताल में दवाओं की जांच की. अधिकारियों के अनुसार, अस्पताल संचालिका को कई बार मौके पर बुलाया गया, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुईं. फिलहाल पुलिस और संबंधित विभाग अस्पताल के संचालन, एक्सपायरी दवाओं की उपलब्धता और शेखर की मौत से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं.
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