Dussehra 2026: दशहरे पर यहां नहीं जलता रावण का पुतला, बल्कि होती है पूजा, जानिए इसके पीछे की मान्यता
दशहरा 2026
Ravana Effigy Not Burnt: नवरात्रि का त्योहार चल रहा है. देशभर में जश्न का माहौल है. भक्त पूरी श्रद्धा के साथ मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर रहे हैं. आज 19 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्रि की अष्टमी और महानवमी है. नौ दिनों के बाद दसवें दिन विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाता है, जब देशभर में रावण का पुतला जलाया जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल रावण दहन 20 अक्टूबर को होगा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक तरफ जहां रवण का पुतला जलाया जाता है, वहीं देश के कुछ हिस्से ऐसे भी हैं जहां रावण की पूजा की जाती है. आइए जानते हैं उन जगहों के बारे में.
यहां रावण को माना जाता है दामाद
मध्य प्रदेश के लगभग हर हिस्से में दशहरे पर रावण का पुतला जलाया जाता है. लेकिन मंदसौर एक ऐसा जिला है जहां रावण दहन नहीं होता. मंदसौर के खानपुरा इलाके में नामदेव समुदाय सदियों से रावण को अपना दामाद मानता है. स्थानीय लोगों की कहना है कि रावण की पत्नी मंदोदरी इसी क्षेत्र की थीं. इसलिए दशहरे के दिन यहां रावण का दहन नहीं किया जाता, बल्कि उसकी पूजा की जाती है.
यहां होती है सच्चे मन से पूजा
महाराष्ट्र के कई हिस्सों में रावण दहन के लिए बड़े-बड़े पुतले तैयार किए गए हैं. लेकिन महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में रहने वाले गोंड समुदाय के लोग रावण का बहुत सम्मान करते हैं. यहां के गोंड समुदाय के लोग रावण का दहन नहीं करते, बल्कि सच्ची श्रद्धा के साथ उसकी पूजा-अर्चना करते हैं.
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इस जगह हुआ था रावण का जन्म
उत्तर प्रदेश में दशहरे को लेकर जश्न का माहौल है. रावण दहन की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. लेकिन नोएडा के पास बिसरख नामक स्थान स्थित है, जो दुनियाभर में प्रसिद्ध है. यहां के स्थानीय लोगों का मानना है कि इसी स्थन पर रावण का जन्म हुआ था. इस गांव का नाम रावण के पिता ऋषि विश्वश्रवा से जोड़कर देखा जाता है. इसलिए दशहरे के दिन यहां रावण की पूजा की जाती है.