Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि आज, जानें घटस्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
Shardiya Navratri 2026: यह अनुष्ठान नौ दिवसीय उत्सव के आरंभ का प्रतीक होता है. नौ दिनों तक माता रानी के साथ इस पवित्र कलश की पूजा की जाती है. फिर नवरात्रि के समापन के बाद इस कलश को विधि-विधान से विसर्जित कर दिया जाता है. आइए जानते हैं कलश स्थापना कैसे करनी चाहिए और इसका शुभ मुहूर्त क्या है.
शारदीय नवरात्रि 2026
Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि 2026 की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026 दिन रविवार से हो चुकी है और इसका समापन 20 अक्टूबर को होगा. इस बार अष्टमी और नवमी दोनों एक साथ 19 अक्टूबर को मनाई जाएंगी. जबकि दशहरा पर्व 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा. नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना यानी घटस्थापना की जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस पवित्र कलश में सभी देवी-देवताओं, पवित्र नदियों और सकारात्मक शक्तियों का वास होती है.
यह अनुष्ठान नौ दिवसीय उत्सव के आरंभ का प्रतीक होता है. नौ दिनों तक माता रानी के साथ इस पवित्र कलश की पूजा की जाती है. फिर नवरात्रि के समापन के बाद इस कलश को विधि-विधान से विसर्जित कर दिया जाता है. इए जानते हैं कलश स्थापना कैसे करनी चाहिए और इसका शुभ मुहूर्त क्या है.
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 2026
- कलश स्थापना (घटस्थापना) – 11 अक्टूबर 2026 शनिवार.
- शुभ मुहूर्त – सुबह 06:19 बजे से 10:12 बजे तक.
- अभिजित मुहूर्त – सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक.
- प्रतिपदा तिथि प्रारंभ – 10 अक्टूबर 2026 को रात 09:19 बजे.
- प्रतिपदा तिथि समाप्त – 11 अक्टूबर 2026 को रात 09:30 बजे.
कलश स्थापना की सरल विधि
- घर में जिस स्थान पर कलश स्थापना कर रहे हैं, उस जगह को गंगाजल से शुद्ध कर लें.
- कलश स्थापना के लिए पूर्व या उत्तर दिशा के अलावा ईशान कोण भी शुभ माना जाता है.
- स्थापना वाले स्थान पर थोड़ी सी साफ मिट्टी बिछाएं और उस पर जौ के दाने डाल दें.
- फिर जौ के दानों पर थोड़ी मिट्टी डालकर उसे अच्छी तरह ढक दें और थोड़ा जल छिड़क दें.
- इसके बाद एक कलश में जल और गंगजल भर लें और उसमें एक सिक्का डाल दें.
- अब कलश के ऊपर आम या अशोक के पत्ते रखें.
- कलश पर कलावा बांधें और उसके मुंह पर मिट्टी का कटोरा रखें, उस कटोरे को जौ या चावल से भर दें.
- फिर एक जटा वाला नारियल लाल चुन्नी मी लपेटकर कलश के ऊपर रख दें.
- इस विधि से कलश स्थापना करने के बाद देवी मां का आह्वान करें.
- ध्यान रहे नवरात्रि में माता रानी की पूजा के साथ-साथ रोज कलश की भी पूजा करनी चाहिए.