‘पहले छात्रों का प्रदर्शन था, अब मुद्दा बदल गया…’, सौरभ-रांका को दिल्ली HC की फटकार, CJP नेताओं ने वापस ली अर्जी
सौरभ दास और आशुतोष रांका
CJP Petition Withdrawal Controversy: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सौरभ दास और आशुतोष रांका की याचिका पर आज बुधवार को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. जिसमें कोर्ट ने साफ कहा कि याचिकाकर्ता ने बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन किया है. सौरभ दास और आशुतोष रांका ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के उस आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें उनकी हिरासत की अवधि बढ़ा दी गई थी.
हाई कोर्ट ने इस दौरान आशुतोष और सौरभ को फटकार लगाई. कोर्ट ने कहा कि जब याचिकाकर्ता सबसे आगे रहकर बैरिकेड तोड़ते हैं, तो बड़ी संख्या में अन्य लोगों के भी ऐसा करने की आशंका रहती है और कुछ लोग उनके नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं. इतना ही कोर्ट ने बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने पर भी सवाल उठाया.
सीधे हाई कोर्ट कैसे आए?: HC
हाई कोर्ट ने फटकार लगाते हुए पूछा कि कानून में अपील और दूसरे वैकल्पिक उपाय मौजूद हैं, तो याचिकाकर्ता सीधे संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट क्यों आए हैं. कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को SEM की कार्यवाही का पालन करने दिया जाए. क्योंकि इन पहलुओं पर फैसला SEM को करना है.
पहले छात्र प्रदर्शन, लेकिन अब मुद्दा अलग
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सौरभ और आशुतोष से उनकी उम्र पूछी तो वकील ने बताया कि सौरभ की उम्र 27 और आशुतोष की उम्र 32 साल है. तब जस्टिस प्रसाद ने पूछा कि क्या वे जेन-जी हैं और जेन-जी किसे कहते हैं? जस्टिस प्रसाद ने इस दौरान कहा कि जुलाई में छात्र प्रदर्शन हुआ था, लेकिन अब मुद्दा अलग है. लोग वही हैं, लेकिन वजह बदल रही है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि प्रदर्शनकारी कौन हैं, वे क्या करते हैं, किस संगठन से जुड़े हैं और संगठन का उद्देश्य क्या है?
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13 अक्टूबर से जेल में बंद हैं सौरभ-आशुतोष
जस्टिस प्रसाद ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन जब कानून में वैकल्पिक उपाय उपलब्ध हो, तो उस पर भी विचार करना चाहिए. बता दें, सौरभ दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर परिसर में प्रवेश करने की वजह से हिरासत में लिया था. जिसके बाद उन्हें 5 दिनों की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ भेज दिया गया. लेकिन 5 दिनों के बाद भी जेल से बाहर नहीं आए, क्योंकि उनकी न्यायिक हिरासत को बढ़ा दिया गया. पुलिस को आशंका है कि अगर दोनों को रिहा किया गया तो फिर से कानून तोड़ा जा सकता है.