एमपी विधानसभा को ऑनलाइन करने की लड़ाई, ट्रेनिंग में पहले सत्र में 13 और दूसरे में सिर्फ 8 विधायक पहुंचे
मध्यप्रदेश विधानसभा
भोपाल: मध्यप्रदेश विधानसभा की कार्यवाही को ऑनलाइन और पेपरलेस बनाने के लिए सरकार और विधानसभा स्तर पर लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं. डिजिटल संसदीय प्रणाली लागू करने के लिए ई-विधान (नेवा) की व्यवस्था तैयार की जा रही है, ताकि विधायकों को सवाल लगाने, सूचनाएं देने और सदन की कार्यवाही से जुड़ी प्रक्रियाओं में आसानी हो सके. लेकिन जब इसी व्यवस्था को समझने और सीखने के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, तो विधायकों की उपस्थिति ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
प्रदेश में 230 विधायकों वाली विधानसभा के लिए आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में 29 अक्टूबर को पहले सत्र में महज 13 विधायक शामिल हुए, जबकि दूसरे सत्र में केवल 8 विधायक पहुंचे. इसके मुकाबले पहले सत्र में 19 निजी सहायक और दूसरे सत्र में 10 निजी सहायक उपस्थित रहे. यानी जिस डिजिटल व्यवस्था को सीधे विधायकों को सीखना था, उसके प्रशिक्षण में उनके मुकाबले निजी सहायकों की मौजूदगी ज्यादा रही.

ऑनलाइन व्यवस्था की मांग, सीखने में बेरुखी!
विधानसभा की कार्यवाही को डिजिटल बनाने, कागजों का इस्तेमाल कम करने और सदन की प्रक्रियाओं को ऑनलाइन करने के लिए सरकार और सदन में लगातार प्रयास किए जाते रहे हैं. विधायकों के लिए यह व्यवस्था समय बचाने और संसदीय कामकाज को सरल बनाने का माध्यम है. इसके बावजूद प्रशिक्षण में इतनी कम उपस्थिति जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाती है.
प्रशिक्षण का उद्देश्य विधायकों को डिजिटल संसदीय कार्यप्रणाली से परिचित कराना और विधानसभा की कार्यवाही को अधिक सरल, सुगम एवं पेपरलेस बनाना है. इसके लिए तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया है. लेकिन 29 अक्टूबर के दोनों सत्रों में विधायकों की संख्या बेहद कम रही. निजी सहायकों और कर्मचारियों की मौजूदगी यह सवाल भी खड़ा करती है कि क्या डिजिटल संसदीय प्रणाली को समझने की जिम्मेदारी भी विधायक अपने सहयोगियों के भरोसे छोड़ रहे हैं?
पहले सत्र में ये 13 विधायक पहुंचे
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पहले सत्र में घनश्याम सिंह, ओमप्रकाश धुर्वे, अनुभा मुंजरे, योगेंद्र सिंह बाबा, विश्वनाथ सिंह, चौधरी सुजीत मेर सिंह, सोहनलाल बाल्मीकि, नीलेश पूसाराम उइके, कुँवर अभिजीत शाह, प्रेमशंकर कुंजीलाल वर्मा, विजयपाल सिंह, ठाकुरदास नागवंशी और डॉ. रामकिशोर दोगने शामिल हुए.
दूसरे सत्र में सिर्फ 8 विधायक
दूसरे सत्र में भगवानदास सबनानी, सुदेश राय, हजारीलाल डांगी, मनोज नारायण सिंह चौधरी, आशीष गोविंद शर्मा, मंजू राजेंद्र दादू, डॉ. हीरालाल अलावा और मधु भाऊ भगत उपस्थित रहे.

ट्रेनिंग में लाखों करोड़ों खर्च
जानकारी के अनुसार विधानसभा की ऑनलाइन ट्रेनिंग के लिए लाखों रुपए खर्च भी किए गए हैं. बाकायदा इस सिस्टम को तैयार करने के लिए 4 से 5 करोड रुपए का बजट रखा गया है जिसके जरिए विधानसभा की कार्रवाई पूरी तरीके से ऑनलाइन हो सके. हैरत की बात है कि विधानसभा सचिवालय ट्रेनिंग करा रहा है लेकिन विधायक ट्रेनिंग करने से पीछे हट रहे हैं.
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