Balrampur: बलरामपुर में चेकडेम से मिली सिंचाई की सुविधा, अब बदलेगी किसानों की तस्वीर

Balrampur: ग्राम पंचायत चन्द्रगढ़ के कोरोना नाला में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी (मनरेगा) योजना के तहत निर्मित हो रहा चेकडेम ग्रामीणों के लिए आत्मनिर्भरता की नई राह खोल रहा है. यह परियोजना जल संरक्षण के साथ-साथ रोजगार सृजन और खेती-किसानी में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन रही है.
Balrampur

चेकडेम

Balrampur: बलरामपुर जिले के जनपद पंचायत राजपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत चन्द्रगढ़ के कोरोना नाला में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी (मनरेगा) योजना के तहत निर्मित हो रहा चेकडेम ग्रामीणों के लिए आत्मनिर्भरता की नई राह खोल रहा है. यह परियोजना जल संरक्षण के साथ-साथ रोजगार सृजन और खेती-किसानी में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन रही है. चेकडेम का निर्माण कार्य ग्रामीण यांत्रिकी विभाग की निगरानी में किया जा रहा है.

किसानों को चेकडेम से मिली सिंचाई की सुविधा

बलरामपुर कलेक्टर राजेंद्र कटारा एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी नयनतारा सिंह तोमर के मार्गदर्शन में ग्रामीणों के सक्रिय सहयोग से यह कार्य तेजी से पूरा किया जा रहा है. चेकडेम बनने से वर्षा जल का संरक्षण होगा, जिससे भूजल स्तर में वृद्धि होगी और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सकेगा.

इस परियोजना से सीधे तौर पर कई किसानों को लाभ मिलेगा। इनमें सुन्दर लाल (0.5 हेक्टेयर), हरिप्रसाद (0.175 हेक्टेयर), बुधराम (0.175 हेक्टेयर), जगत राम (0.175 हेक्टेयर), कृष्णा राम (0.175 हेक्टेयर), जढ्दू राम (0.175 हेक्टेयर), शंकर (0.5 हेक्टेयर), लाल साय (0.65 हेक्टेयर), रामचरण (0.75 हेक्टेयर) और चितरंजन (0.64 हेक्टेयर) प्रमुख हैं। इसके अलावा आसपास के 20 से 25 अन्य किसानों को भी इसका लाभ मिलेगा. ग्रामीणों का कहना है कि पहले पानी की कमी के कारण सिंचाई में काफी दिक्कत होती थी, जिससे फसल उत्पादन प्रभावित होता था। लेकिन चेकडेम बनने के बाद यह समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी.

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किसानों को फसल उत्पादन करने में मिलेगी सुविधा

अब किसान मक्का, गेहूं, सरसों, धान, अरहर और उड़द जैसी पारंपरिक फसलों के साथ-साथ परवल, भिंडी, बरबटी और मटर जैसी सब्जियों का उत्पादन भी आसानी से कर सकेंगे. ग्रामीणों का मानना है कि यह चेकडेम न केवल जल संरक्षण का प्रभावी साधन है, बल्कि इससे उनकी आय में वृद्धि होगी और गांव की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी. मनरेगा के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने से ग्रामीणों को अपने ही गांव में काम उपलब्ध हो रहा है, जिससे पलायन की समस्या में भी कमी आने की उम्मीद है.

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