क्या है बस्तर का गोंचा महापर्व? जिसमें बांस की तुपकी से दी जाती है भगवान जगन्नाथ को सलामी

Bamboo Tupki Salute to Jagannath: इस वर्ष विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा 16 जुलाई 2026 को निकाली जाएगी, पूरे देश में इन दिनों जगन्नाथ रथयात्रा की धूम है. ओडिशा के पुरी की तर्ज पर छत्तीसगढ़ के बस्तर में भी गोंचा महापर्व बेहद खास और पारंपरिक अंदाज में मनाया जाता है.
CG Bastar Goncha Mahaparv Tradition

Bamboo Tupki Salute to Jagannath: इस वर्ष विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा 16 जुलाई 2026 को निकाली जाएगी, पूरे देश में इन दिनों जगन्नाथ रथयात्रा की धूम है. ओडिशा के पुरी की तर्ज पर छत्तीसगढ़ के बस्तर में भी गोंचा महापर्व बेहद खास और पारंपरिक अंदाज में मनाया जाता है.

बस्तर का गोंचा महापर्व, 600 पुरानी हैं परम्परा

सदियों पुरानी परंपरा और 360 आरण्यक ब्राह्मण समाज के अनूठे संगम वाले इस पर्व का मुख्य आकर्षण तुपकी है, गोंचा महापर्व समिति ने बताया कि इस वर्ष 100 युवा तुपकी की सलामी देंगे, बस्तर के आदिवासियों द्वारा बांस से बनाई जाने वाली इस पारंपरिक बंदूक तुपकी से भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और बलभद्र को 21 तोपों की तर्ज पर गार्ड ऑफ ऑनर सलामी दी जाती है, पूरे भारत में केवल बस्तर में ही यह परंपरा देखने को मिलती है, 600 साल पुरानी परंपरा न सिर्फ श्रद्धालुओं का केंद्र है, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों के रोजगार का एक बड़ा जरिया भी है.

बांस की तुपकी से दी जाती है भगवान जगन्नाथ को सलामी

बस्तर में गोंचा पर्व के दौरान तुपकी का चलन सैकड़ों सालों से चला आ रहा है. जो केवल बस्तर में ही देखने को मिलता है. इक्कीस तोपों से दी जाती है सलामीबस्तर में 600 सालों से मनाए जाने वाले गोंचा पर्व में तुपकी खास आकर्षण का केंद्र भी होता है.

यही वजह है कि ग्रामीण इन तुपकी को रंग-बिरंगी कागज और पन्नियों से सजाकर इसे और भी आकर्षक बनाते हैं. 21 तोपों की सलामी के तर्ज पर दी जाती है. तुपकी से सलामीबस्तर के ग्रामीण अंचलों में रहने वाले आदिवासियों के द्वारा तुपकी को तैयार किया जाता है. इस पर्व के दौरान अंदरूनी गांव से आने वाले ग्रामीणों को तुपकी बेचकर एक अच्छी आय भी होती है.

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