CG News: हाई कोर्ट पहुंचा फॉर्च्यून एलिमेंट्स प्रोजेक्ट विवाद, कोर्ट ने 60 दिन में फैसला करने के दिए निर्देश, जानें पूरा मामला
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट
CG News: छत्तीसगढ़ में फॉर्च्यून बिल्डकॉन के बहुचर्चित फॉर्च्यून एलिमेंट्स आवासीय प्रोजेक्ट को लेकर चल रहा विवाद अब हाई कोर्ट तक पहुंच गया है. परियोजना में कथित अनियमितताओं की शिकायत करने वाले फर्म के 15 प्रतिशत हिस्सेदार मयंक अग्रवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने संबंधित प्राधिकारी को सभी पक्षों को सुनने के बाद 60 दिनों के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं.
मयंक अग्रवाल ने बोदरी नगर परिषद समेत विभिन्न विभागों में शिकायत कर आरोप लगाया है कि परियोजना में स्वीकृत लेआउट से अलग निर्माण, नियमों का उल्लंघन और अन्य अनियमितताएं की गई हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि फर्म और परियोजना की संपत्तियों को गिरवी रखकर लगभग 100 करोड़ रुपए का ऋण उनकी सहमति के बिना लिया गया तथा कुछ दस्तावेजों में उनके हस्ताक्षर भी कथित रूप से जाली बनाए गए.
क्या है पूरा मामला?
याचिका में मयंक अग्रवाल ने कहा था कि 18 मई 2026 को मुख्य नगरपालिका अधिकारी, नगर परिषद बोदरी को शिकायत देने के बावजूद उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. इस पर हाईकोर्ट के जस्टिस एके प्रसाद की एकलपीठ ने शिकायत पर विचार करने का निर्देश दिया. हालांकि सुनवाई के दौरान फॉर्च्यून बिल्डकॉन के भागीदार पवन अग्रवाल व अन्य ने आपत्ति जताई कि उन्हें शिकायत में पक्षकार नहीं बनाया गया है.
हाई कोर्ट ने मयंक अग्रवाल को सात दिनों के भीतर नई शिकायत प्रस्तुत करने तथा उसकी प्रति संबंधित भागीदारों को देने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा कि सभी पक्षों को सुनवाई का अवसर देने के बाद सक्षम प्राधिकारी 60 दिनों के भीतर कानून के अनुसार निर्णय ले.
कमर्शियल कोर्ट ने पहले दिया था आदेश
इससे पहले नवा रायपुर स्थित कमर्शियल कोर्ट भी इसी विवाद में महत्वपूर्ण आदेश दे चुकी है. फॉर्च्यून बिल्डकॉन के भागीदारों ने अदालत से मयंक अग्रवाल को सरकारी विभागों, बैंकों और अन्य संस्थाओं में शिकायत करने से रोकने की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया. अदालत ने कहा था कि किसी व्यक्ति को कथित अनियमितताओं की जानकारी संबंधित विभागों और संस्थाओं को देने से नहीं रोका जा सकता. वहीं, फॉर्च्यून बिल्डकॉन प्रबंधन ने मयंक अग्रवाल के आरोपों को निराधार बताया है, जबकि मयंक का कहना है कि वे निवेशकों के हितों और परियोजना में कथित अनियमितताओं को उजागर करने के लिए शिकायत कर रहे हैं.
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पूर्व में रेरा ने लगाया था 10 लाख का जुर्माना
ज्ञात हो कि, कुछ समय पहले ही रियल एस्टेट क्षेत्र में भ्रामक विज्ञापनों पर सख्ती दिखाते हुए छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (सीजी रेरा) ने बिलासपुर के बोदरी स्थित फॉर्च्यून एलिमेंट्स परियोजना के प्रवर्तक पवन अग्रवाल पर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था. प्राधिकरण ने पाया था कि परियोजना का पंजीयन प्लॉटेड डेवलपमेंट के रूप में किया गया था, लेकिन विभिन्न प्रिंट और डिजिटल माध्यमों में इसे हाउसिंग परियोजना के रूप में प्रचारित किया जा रहा था, जो कि पंजीकृत विवरण के विपरीत और भ्रामक है.