बोर-बासी पर सियासत! भूपेश बघेल के मिट्टी के बर्तन में बोरे-बासी खाने को गजेंद्र यादव ने बताया प्रोपेगेंडा, जमकर साधा निशाना
CG News: छत्तीसगढ़ के पूर्व CM भूपेश बघेल ने 1 मई अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के मौके पर बोरे बासी दिवस मनाया. भूपेश बघेल ने पारंपरिक बोरे बासी खाकर श्रमिक दिवस की शुभकामनाएं दी. वहीं इसे लेकर प्रदेश में जमकर सियासत हो रही है. शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इसे प्रोपेगेंडा बताया है.
कांग्रेस नेताओं के साथ भूपेश बघेल ने खाया बोरे-बासी
1 मई को दुर्ग स्थित राजीव भवन में कांग्रेस नेताओं के साथ भूपेश बघेल ने पारंपरिक बोरे बासी खाकर श्रमिक दिवस मनाया. इस मौके पर उन्होंने कहा कि बोरे बासी छत्तीसगढ़ के किसान और मजदूर वर्ग का मुख्य भोजन है, जिसे उनकी सरकार ने बोरे बासी दिवस के रूप में पहचान दिलाई. पूर्व सीएम ने बोरे और बासी को गर्मी में अमृत बताते हुए इस परंपरा को आगे भी जारी रखने की बात कही. उन्होंने कहा कि बोरे बासी स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है. बोरे बासी में गजब विटामिन भरा हुआ है.
सरकार केवल नाम बदलकर त्योहार मना रही
वहीं भाजपा सरकार के सुशासन तिहार पर निशाना साधते हुए बघेल ने कहा कि सरकार केवल नाम बदलकर त्योहार मना रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हो रहा. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बिजली तिहार, चावल त्योहार, ये सब सिर्फ दिखावा है.
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गजेंद्र यादव ने बताया प्रोपेगेंडा
वहीं मिट्टी के बर्तन में बोरे बासी खाने को लेकर BJP ने सवाल उठाए हैं. स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने निशाना साधते हुए कहा कि मिट्टी के बर्तन में बोरे बासी खाकर भूपेश बघेल ने प्रोपेगेंडा किया. पिंडदान और पितृ भोज में मिट्टी के बर्तन का उपयोग किया जाता है. भूपेश बघेल क्या कांग्रेस पार्टी का पिंडदान करने गए थे? कांग्रेस त्यौहार मना कर क्या साबित करना चाहती है. क्या छत्तीसगढ़ के लोग बासी ही खाएं?