CG News: पीएचडी फीस घोटाले में चालान पेश, छात्रों की लाखों की रकम ऑनलाइन बेटिंग और शेयर ट्रेडिंग में उड़ाने का आरोप
आरोपी गिरफ्तार
CG News: छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (सीएसवीटीयू) में पीएचडी फीस धोखाधड़ी मामले में नेवई पुलिस ने जांच पूरी कर आरोपी कर्मचारी सुनील कुमार प्रसाद के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश कर दिया है.आरोपी पर शोधार्थियों से वसूली गई लाखों रुपए की फीस का गबन कर उसे ऑनलाइन बेटिंग, शेयर ट्रेडिंग और निजी खर्चों में इस्तेमाल करने का आरोप है.
शिकायत के बाद खुला पूरा मामला
दरअसल, मामला नवंबर 2025 में सामने आया था, जब कई पीएचडी शोधार्थियों ने शिकायत की कि फीस जमा करने के बावजूद उनकी एंट्री विश्वविद्यालय के पोर्टल पर अपडेट नहीं हुई. शिकायत के बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन ने अंतरिम जांच समिति गठित की. जांच में सामने आया कि पीएचडी शाखा में दैनिक मानदेय पर कार्यरत सुनील कुमार प्रसाद छात्रों से 30-30 हजार रुपए लेकर फर्जी फीस रसीद जारी कर रहा था.
निजी खातों में जमा करवाई जा रही थी फीस
कई विद्यार्थियों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने नकद और ऑनलाइन माध्यम से रकम जमा की थी, जिसे आरोपी अपने निजी खातों में ट्रांसफर करवा रहा था. प्रारंभिक जांच में 9 लाख 44 हजार 500 रुपए के गबन की पुष्टि हुई थी, जिसके बाद 2 फरवरी 2026 को नेवई थाने में एफआईआर दर्ज की गई. जांच के दौरान आरोपी के बैंक खातों में करीब 1 करोड़ 80 लाख रुपए के लेनदेन का खुलासा हुआ.
बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों से जुटाए गए सबूत
भिलाई नगर सीएसपी सत्य प्रकाश तिवारी ने बताया कि बैंक रिकॉर्ड, विद्यार्थियों के बयान, डिजिटल ट्रांजेक्शन और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर जांच की गई. पुलिस ने मामले से जुड़े सभी वित्तीय और तकनीकी पहलुओं की बारीकी से पड़ताल की.
ड्रीम 11 और ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म पर खर्च की रकम
6 फरवरी को आरोपी की जमानत खारिज होने के बाद 9 फरवरी को पुलिस ने उसे रिमांड पर लिया. पूछताछ में पता चला कि अवैध रूप से वसूली गई रकम का बड़ा हिस्सा ड्रीम 11 और Sportsarena जैसे ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म पर खर्च किया गया. आरोपी शेयर ट्रेडिंग में भी लगातार निवेश कर रहा था.
पत्नी के खातों की भी हुई जांच
पुलिस ने आरोपी की पत्नी के बैंक खातों और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की भी जांच की है. आरोपी ने पूछताछ में कुछ पूर्व अधिकारियों के नाम लिए थे, लेकिन अब तक किसी अधिकारी तक रकम पहुंचने के प्रमाण नहीं मिले हैं. उन्होंने कहा कि आरोपी फर्जी दस्तावेज तैयार कर शोधार्थियों को गुमराह करता था. अब मामले की सुनवाई न्यायालय में होगी.
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