रायपुर कमिश्नरेट का बढ़ेगा दायरा, शहर से लगे छह थाने शामिल करने का प्रस्ताव
रायपुर. राजधानी में लागू पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था का दायरा बढ़ाने की कवायद अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है. पुलिस मुख्यालय में कई दौर की बैठकों के बाद शासन को प्रस्ताव भेजा गया है. इसमें शहर से लगे छह थानों को कमिश्नरेट में शामिल करने का सुझाव दिया गया है. हालांकि पीएचक्यू की उच्चस्तरीय कमेटी ने इससे आगे बढ़कर पूरे रायपुर जिले को पुलिस कमिश्नरेट के दायरे में लाने की अनुशंसा की है. अब अंतिम फैसला शासन स्तर पर होना है. प्रस्ताव के अनुसार विधानसभा, माना कैंप, मंदिरहसौद, धरसींवा, अभनपुर और अधिसूचना में शामिल नवा रायपुर के नए थाने को कमिश्नरेट में शामिल किए जाने की संभावना है. इस बदलाव के बाद कमिश्नरेट की सीमाएं शहर से लगे महत्वपूर्ण इलाकों तक विस्तारित हो जाएंगी.
पूरे जिले को कमिश्नरेट में लाने के पक्ष में PHQ
पुलिस मुख्यालय की उच्चस्तरीय कमेटी पहले ही पूरे रायपुर जिले में कमिश्नरेट व्यवस्था लागू करने की अनुशंसा कर चुकी है. अधिकारियों का तर्क है कि रायपुर ग्रामीण को अलग रखने से पुलिसिंग के साथ प्रशासनिक और वित्तीय स्तर पर भी कई चुनौतियां सामने आ रही हैं. पूरे जिले को कमिश्नरेट में लाने पर करीब 50 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आने का अनुमान है. गृह विभाग को भेजे गए प्रस्ताव में संभावित व्यय का उल्लेख करने के साथ जॉइंट कमिश्नरी व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है. चर्चा है कि रायपुर कमिश्नरेट की नई सीमाओं को लेकर आदेश इसी सप्ताह जारी हो सकता है. हालांकि अंतिम निर्णय शासन ही करेगा.
सात महीने में ही सामने आईं सीमाओं की दिक्कतें
रायपुर में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था 23 जनवरी 2026 से लागू हुई थी. वर्तमान में इसमें 21 थाने शामिल हैं, जबकि रायपुर ग्रामीण को 12 थानों के साथ अलग अधिसूचित किया गया था. अधिसूचना के समय नवा रायपुर और उरला ग्रामीण के दो थाने अस्तित्व में नहीं थे. वहीं 2023 में घोषित सिलतरा चौकी को अब थाना बनाए जाने के बाद रायपुर ग्रामीण में प्रभावी रूप से 11 थाने रह गए हैं.
कमिश्नरेट से बाहर रखे गए माना कैंप, मंदिरहसौद, अभनपुर, राखी, विधानसभा और धरसींवा जैसे क्षेत्रों के कारण एयरपोर्ट, मंत्रालय-सचिवालय, नवा रायपुर, तूता का धरना-प्रदर्शन क्षेत्र और राजधानी का बड़ा औद्योगिक इलाका ग्रामीण पुलिस के अधीन है. इससे शहरी और ग्रामीण पुलिस के बीच समन्वय को लेकर व्यावहारिक दिक्कतें सामने आ रही हैं. कमिश्नरेट लागू करते समय संकेत दिए गए थे कि करीब एक वर्ष के भीतर पूरे जिले को इसके दायरे में लाया जा सकता है. लेकिन कमिश्नरेट और रायपुर ग्रामीण दोनों जगह संसाधनों और सुविधाओं की स्थिति को देखते हुए महज सात महीने में ही सीमाओं में बदलाव की कवायद तेज हो गई है.
दुर्ग-बिलासपुर में फिलहाल कमिश्नरेट पर संशय
दुर्ग और बिलासपुर में पुलिस कमिश्नरेट लागू करने की चर्चा के बीच फिलहाल दोनों शहरों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है. उच्च स्तर से मिले संकेतों के मुताबिक अभी वहां कमिश्नरेट व्यवस्था लागू करने का निर्णय नहीं लिया जाएगा. फिलहाल सरकार का फोकस रायपुर कमिश्नरेट की सीमाओं के विस्तार और व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर है.
पूरे जिले में कमिश्नरेट तो बदल सकती है रेंज आईजी की भूमिका
यदि शासन पूरे रायपुर जिले को कमिश्नरेट के अधीन लाने का फैसला करता है तो रायपुर रेंज आईजी के पद और जिम्मेदारियों में भी बदलाव की संभावना है. वर्तमान में रायपुर रेंज आईजी अमरेश मिश्रा के अधीन रायपुर ग्रामीण के अलावा गरियाबंद, धमतरी, महासमुंद और बलौदाबाजार जिले हैं. हालांकि रायपुर रेंज में पूर्व में दो आईजी की व्यवस्था भी रह चुकी है. उस दौरान एक आईजी के पास रायपुर जिले की जिम्मेदारी थी, जबकि दूसरे के पास एसीबी-ईओडब्ल्यू के साथ बलौदाबाजार, गरियाबंद, धमतरी और महासमुंद की जिम्मेदारी थी. ऐसे में रेंज आईजी की जिम्मेदारी चार जिलों तक सीमित करना पुलिस प्रशासन के लिए नया प्रयोग नहीं होगा.
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