Independence Day 2026: ‘लाल आतंक’ से मिली आजादी, बस्तर के 92 गांवों में आजादी के बाद पहली बार फहराया तिरंगा

Independence Day 2026: आज देशभर में 80वां स्‍वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा है. वहीं आजादी के बाद बस्तर के उन सुदूर और दुर्गम गांवों में भी इस स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा पूरे सम्मान और गर्व के साथ फहराया गया.
Independence Day 2026

बस्तर के गांवों में आजादी के बाद पहली बार फहराया तिरंगा

Independence Day 2026: आज देशभर में 80वां स्‍वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा है. वहीं आजादी के बाद बस्तर के उन सुदूर और दुर्गम गांवों में भी इस स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा पूरे सम्मान और गर्व के साथ फहराया गया.

जहां चार दशकों तक नक्सली हिंसा के कारण राष्ट्रीय पर्व मनाना भी चुनौती बना हुआ था. इस साल बस्तर संभाग के 92 गांवों में पहली बार स्वतंत्रता दिवस का सार्वजनिक आयोजन हुआ. इनमें बीजापुर के 33, सुकमा के 50 और नारायणपुर के 9 गांव शामिल हैं. यह केवल ध्वजारोहण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि भय और हिंसा से निकलकर लोकतंत्र, विकास और सामान्य जीवन की ओर लौटते बस्तर की नई शुरुआत का प्रतीक माना जा रहा है.

बस्तर में निकाली गई तिरंगा यात्रा

वहीं नारायणपुर से तिरंगा यात्रा की शुरूआत हुई थी. काफिला दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर होते हुए आज कर्रेगुट्टा पहुंचा. कभी माओवादियों के बेहद सुरक्षित ठिकाने रहे इन इलाकों में आज तिरंगा शान से लहरा रहा है. बस्तर तिरंगा यात्रा का ताड़ापाला FOB में भव्य समापन हुआ. इस यात्रा में प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा, वनमंत्री, सांसद बस्तर, आईजी, बीजापुर प्रशासन, पुलिस, भाजपा कार्यकर्ता और आम नागरिक शामिल हुए.

ताड़ापाला FOB में गृहमंत्री विजय शर्मा ने फहराया तिरंगा

करीब चार दशक तक हिंसा और खौफ का पर्याय रहे इस क्षेत्र में आज भारत का तिरंगा लहरा रहा है. ताड़ापाला FOB में गृहमंत्री विजय शर्मा ने फ्लैग होस्टिंग के साथ यात्रा का समापन किया. उनके चेहरे की चमक इस बदलाव और जीत की गवाही दे रही थी.

इस मौके पर गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि “यह जीत जवानों, पुलिस, प्रशासन और बस्तर के हर नागरिक की जीत है. माओवाद के दर्द को भुलाया नहीं जा सकता, लेकिन अब बस्तर में डर नहीं, उम्मीद और शांति है” चार दशक का दर्द अपनी जगह है, लेकिन आज बस्तर के इन इलाकों में एक नई तस्वीर दिखाई दे रही है- जहां कभी बंदूक का खौफ था, वहां तिरंगा है… जहां डर था, वहां उम्मीद है… और जहां गुलामी का सन्नाटा था, वहां पहली बार आजादी उतर आई है.

गौरना-मनकेली में पहली बार लहराया तिरंगा

बीजापुर जिला मुख्यालय से महज 7 किलोमीटर दूर गौरना-मनकेली कभी माओवादियों की आर्थिक राजधानी माना जाता था. 2019 तक यहां काले झंडे का खौफ था. 2024 में सीआरपीएफ की तैनाती के बाद हालात बदले. कार्रवाई, सरेंडर और गिरफ्तारियों के बीच माओवाद का प्रभाव कमजोर हुआ लेकिन फिर भी ग्रामीण तिरंगा फहराने के पहले से लेकर फहराए जाने के बाद भी डरे सहमे रहा करते थे और आज 80 वें स्वतंत्रता दिवस पर पहली बार यहां के ग्रामीण बेखौफ और पूरे जोश के साथ तिरंगे को सम्मान देकर खुश नज़र आ रहे हैं.

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