CG News: खून की कमी से युवती की मौत पर बवाल, जांच कमेटी गठित, ABVP और कांग्रेस ने अस्पताल प्रबंधन को घेरा
खून की कमी से युवती की मौत पर बवाल
CG News: दुर्ग जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कथित लापरवाही के चलते सिकल सेल से पीड़ित एक युवती की खून नहीं मिलने के कारण मौत का मामला अब राजनीतिक रूप ले चुका है. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और कांग्रेस, दोनों ने जिला अस्पताल के डॉक्टरों और प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए विरोध प्रदर्शन किया है. कांग्रेस जिला अध्यक्ष एवं पूर्व महापौर धीरज बाकलीवाल ने मृतका के परिजनों को उचित मुआवजा देने, मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.
सिविल सर्जन के खिलाफ नारेबाजी, इस्तीफे की मांग
कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ-साथ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारियों और युवाओं ने भी जिला अस्पताल पहुंचकर सिविल सर्जन के केबिन के बाहर जमकर नारेबाजी की. एबीवीपी के पदाधिकारियों ने अपर कलेक्टर योगिता देवांगन और सीएमएचओ डॉ. मनोज दानी की उपस्थिति में सिविल सर्जन आशीषन मिंज से इस्तीफे की मांग की. संगठन के प्रतिनिधियों ने शिकायत पत्र सौंपते हुए कहा कि यदि जांच रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आने वाले दिनों में अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ बड़ा आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे.
कलेक्टर के निर्देश पर बनाई गई जांच कमेटी
मामले ने तूल पकड़ने के बाद कलेक्टर अभिजीत सिंह के निर्देश पर जांच कमेटी का गठन किया गया है. इस कमेटी में अपर कलेक्टर योगिता देवांगन और सीएमएचओ दुर्ग डॉ. मनोज दानी को शामिल किया गया है. दोनों अधिकारी पूरे मामले की जांच कर रहे हैं. जांच रिपोर्ट आज कलेक्टर दुर्ग को सौंपी जानी है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.
एक जून को हुई थी घटना
यह पूरी घटना 1 जून की है. मृतिका दीपिका को उसके परिजनों ने गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया था. दीपिका सिकल सेल बीमारी से पीड़ित थी. अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे खून चढ़ाने की आवश्यकता बताई और परिजनों से ब्लड डोनर की व्यवस्था करने को कहा. हालांकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार समय पर डोनर की व्यवस्था नहीं कर सका.
परिजनों ने लगाया ब्लड नहीं देने का आरोप
परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों ने खून चढ़ाने की जरूरत बताई थी, लेकिन ब्लड बैंक विभाग ने उन्हें खून उपलब्ध कराने से मना कर दिया. उनका कहना है कि यदि समय पर रक्त उपलब्ध कराया जाता तो दीपिका की जान बचाई जा सकती थी. खून उपलब्ध नहीं होने के कारण ही उसकी मौत हो गई.
अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी उठे सवाल
दीपिका की मौत के बाद जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. आरोप है कि अस्पताल के आपातकालीन विभाग में अव्यवस्था का माहौल बना हुआ है. इतना ही नहीं, मॉर्च्युरी में फ्रीजर खराब होने के कारण वहां रखे शवों से दुर्गंध आने लगी थी. कांग्रेस नेताओं के हस्तक्षेप के बाद मॉर्च्युरी के फ्रीजर को ठीक कराया गया. इस पूरे मामले ने जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं और प्रबंधन व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है.
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