6 रुपये के कैरी बैग ने बढ़ाई Bata की मुश्किलें, कोर्ट ने ठोका 10 हजार का जुर्माना

Bata Carry Bag Compensation: जूते खरीदने गई महिला से 6 रुपये का कैरी बैग शुल्क लेना Bata को भारी पड़ गया. उपभोक्ता आयोग ने माना कि पहले से सूचना नहीं दी गई थी. कंपनी को 10 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया.
कैरी बैग न देना बाटा को पड़ा भारी

कैरी बैग न देना बाटा को पड़ा भारी

Bata Footwear Legal Discrepancy: दिल्ली की एक कंज्यूमर कोर्ट ने बाटा कंपनी को एक ग्राहक को 10 हजार रुपये मुआवजा और मुकदमे का खर्च देने का आदेश दिया है.  यह पूरा मामला एक मामूली से कैरी बैग को लेकर शुरू हुआ  था.  विवाद अब Bata इंड‍िया के लिए महंगा साबित हुआ है. मामला उस समय शुरू हुआ जब एक महिला ग्राहक से जूते खरीदने के दौरान 6 रुपये एक्‍स्‍ट्रा लेकर पेपर कैरी बैग दिया गया था.  

ग्राहक का आरोप था कि स्टोर में कहीं भी यह जानकारी नहीं दी गई थी कि कैरी बैग के लिए अलग से भुगतान करना होगा. उनका कहना था कि अगर पहले से सूचना होती तो वह अपना बैग साथ ला सकती थीं या खरीदारी का फैसला अलग तरीके से ले सकती थीं. यही वजह है कि उनकी तरफ से इस मामले को दर्ज कराया गया था.

कंज्यूमर आयोग ने पूरे मामले पर क्या कहा?

सुनवाई के दौरान कंज्यूमर आयोग ने माना कि दुकानदार साधारण कैरी बैग के लिए शुल्क ले सकते हैं, लेकिन ग्राहकों को इसकी स्पष्ट और पहले से जानकारी देना जरूरी है. आयोग ने पाया कि संबंधित स्टोर में ऐसी कोई प्रमुख सूचना प्रदर्शित नहीं थी, जिससे ग्राहक को अतिरिक्त शुल्क के बारे में पहले से पता चल सके.

कोर्ट ने द‍िया मुआवजा देने का आदेश

आयोग ने यह भी कहा कि उपभोक्ता को सूचित किए बिना बिलिंग के समय अतिरिक्त राशि वसूलना उचित व्यापारिक व्यवहार नहीं माना जा सकता है. इसी आधार पर Bata को ग्राहक को 10,000 रुपये बतौर मुआवजा और कानूनी खर्च देने का निर्देश दिया गया है.  

पहले भी आ चुके इस तरह के मामले

कैरी बैग शुल्क को लेकर इससे पहले भी देश के विभिन्न उपभोक्ता मंचों में कई मामले सामने आ चुके हैं. कई फैसलों में अदालतों ने कहा है कि यदि ग्राहक को पहले से स्पष्ट सूचना और विकल्प दिया जाए तो साधारण बिना ब्रांड वाले बैग के लिए शुल्क लिया जा सकता है, लेकिन जानकारी छिपाकर शुल्क वसूलना विवाद का कारण बन सकता है.  

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