जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान दर्ज FIR सुप्रीम कोर्ट ने किए रद्द, CJP ने मार्च लिया वापस
सुप्रीम कोर्ट
CJP Protest: देश की राजधानी जंतर-मंतर पर पिछले महीने हुए कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान कई लोगों पर मामले दर्ज किए गए थे. प्रदर्शनकारियों और सरकार के बीच भी इस बात पर सहमति बनी थी कि वह केस वापस लेंगे. इसके बाद ही प्रदर्शन खत्म किया गया था. हालांकि ऐसा नहीं हुआ. वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए सीजेपी ने दिल्ली मार्च का ऐलान किया था. अब इस मामले में 4 राज्यों में दर्ज 129 केस सुप्रीम कोर्ट ने वापस ले लिए हैं. यही वजह है कि सीजेपी ने अपना मार्च वापस ले लिया है.
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद सरकार ने कहा कि हमने जो वादा किया था. उसको निभा दिया है. मंगलवार (1 सितंबर) को सरकार ने एफआईआर को रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट से अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करने की अपील की, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी स्वीकार कर लिया है.
मामले पर फैसला सुनाते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अब एफआईआर खत्म हो चुकी हैं, इसके साथ ही यह इतिहास बन गया है. इन मामले में अब कोई एक्शन नहीं होगा. दरअसल अनुच्छेद 142 के इस्तेमाल के बाद कोई भी फैसले को अदालत में चुनौती नहीं दे सकता है.
किन लोगों पर दर्ज होगी एफआईआर
सरकार ने कोर्ट में अपनी तरफ से कहा कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के डेटाबेस के मुताबिक, दिल्ली में क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले 2,873 व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा जारी रहेगा. जांच केवल शारीरिक क्षति या संपत्ति को नष्ट करने के अपराधों तक ही सीमित रहेगी. इन सभी लोगों के खिलाफ अब केवल एक एफआईआर दर्ज होगी. उसी के तहत जांच की जाएगी.
कोर्ट में यह भी तय हुआ कि जिन लोगों की मौत पेपर लीक के कारण हुई. या जिन लोगों ने सुसाइड किया. उनके मुआवजे पर अगले तीन महीने के भीतर फैसला लिया जाएगा. सरकार ने भी कहा कि हमने जो वादा किया था. उस पर कायम हैं.
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