एथेनॉल पर उठे सवालों के बीच नितिन गडकरी का जवाब, बोले- मुझे नहीं, किसानों और देश को हो रहा फायदा
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी
Ethanol Fuel: देशभर में पिछले कई दिनों से एथेनॉल को लेकर बहस छिड़ी हुई है. कई लोगों की तरफ से दावा किया जा रहा है कि एथेनॉल वाला फ्यूल यूज करने के कारण उनका वाहन खराब हुआ है. तो वहीं कई लोगों का आरोप है कि इसके कारण माइलेज पर बुरा असर पड़ा है. इन सब को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी पर आरोप है कि यह सब वे अपने निजी हितों को लेकर कर रहे हैं. यही वजहै कि उन्होंने इन सब आरोपों पर अब सफाई के साथ-साथ आंकड़े भी पेश किए हैं, जिसमें उन्होंने बताया कि असल मायने में फायदा किसे हुआ है.
नितिन गडकरी ने एथेनॉल नीति को लेकर चल रही बहस पर अपनी बात रखते हुए कहा कि इस पूरी पहल से उन्हें किसी भी तरह का निजी या आर्थिक लाभ नहीं मिला है. उन्होंने स्पष्ट किया कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का उद्देश्य देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना, कच्चे तेल के आयात पर खर्च कम करना और किसानों की आय बढ़ाना है.
फ्यूल पर निर्भरता हुई कम- गडकरी
नितिन गडकरी ने बताया कि वर्ष 2014 में भारत में एथेनॉल ब्लेंडिंग महज 1.5 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 20 प्रतिशत के लक्ष्य तक पहुंच चुकी है. इस बदलाव की वजह से देश को विदेशी मुद्रा की बड़ी बचत हुई है और पेट्रोल में आयातित ईंधन की निर्भरता कम हुई है. उन्होंने कहा कि एथेनॉल कार्यक्रम के कारण करीब 1.25 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है.
उन्होंने किसानों के हितों का भी जिक्र किया. गडकरी के मुताबिक एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से गन्ना, मक्का और अन्य फसलों की मांग बढ़ी है, जिससे किसानों को सीधा फायदा मिला है. उन्होंने दावा किया कि इस पहल से करीब 45 हजार करोड़ रुपये किसानों तक पहुंचे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली और कृषि क्षेत्र में आय के नए अवसर बने.
एथेनॉल से वाहनों को पहुंचा नुकसान?
एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से वाहनों को नुकसान होने के आरोपों पर गडकरी ने कहा कि अब तक इस संबंध में कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण सामने नहीं आया है. उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास ऐसा कोई प्रमाण है कि एथेनॉल की वजह से वाहन खराब हुआ है, तो वह उसे सार्वजनिक करे. उनका कहना था कि बिना तथ्यों के भ्रम फैलाना उचित नहीं है.
गडकरी ने यह भी कहा कि भारत हर साल 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कच्चा तेल आयात करता है. यदि वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग बढ़ेगा तो आयात बिल घटेगा, प्रदूषण कम होगा और देश ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा. उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस एथेनॉल के साथ-साथ बायोफ्यूल, ग्रीन हाइड्रोजन और अन्य स्वच्छ ईंधनों को बढ़ावा देने पर भी है.
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