NEET UG 2026 एग्जाम का क्वेश्चन पेपर लीक! सीकर के काउंसलर राकेश मंडावरिया के पास कैसे पहुंचा, NTA क्या बोला?
NEET UG 2026 को लेकर उठ रहे सवाल
NEET Guess Paper Case: देश में आज के समय में किसी भी पेपर की आसानी से परीक्षा आयोजित नहीं हो पा रही है. किसी न किसी स्टेज पर पेपर में धांधली के आरोप लग ही जाते हैं. इन्हीं सब के बीच देश की सबसे कठिन एडमिशन एग्जाम NEET-UG 2026 को लेकर भी कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं. यह पेपर परीक्षा से पहले ही लीक हो गया था. इसके साथ यह भी पाया कि पेपर को बिचौलियों की तरफ से मोटी कीमत पर बेचा भी जा रहा था.
नेशनल एंट्रेंस कम एलिजिबिलिटी टेस्ट (NEET) अंडर ग्रेजुएट (UG) 2026 पेपर वायरल मामले में राजस्थान पुलिस SOG ने बड़े खुलासे किए हैं. एसओजी ने बताया कि यह पेपर 15 दिन से एक महीने पहले से कैंडिडेट्स के पास था, इसके साथ ही इसे कई बार फॉरवर्ड किया गया था.
जांच एजेंसियों के सामने ऐसे तथ्य आए हैं, जिनसे यह मामला सिर्फ “गेस पेपर” तक सीमित नहीं बल्कि बड़े नेटवर्क की तरफ इशारा करता दिखाई दे रहा है. जांच में सामने आया है कि कथित गेस पेपर सबसे पहले राजस्थान के सीकर में मेडिकल एडमिशन काउंसलिंग का काम करने वाले राकेश कुमार मंडावरिया के मोबाइल फोन तक पहुंचा था.
600 नंबर तक के सवाल मिलने का दावा
सूत्रों के मुताबिक, परीक्षा से पहले जो प्रश्न बैंक या गेस पेपर छात्रों तक पहुंचा था, उसमें बड़ी संख्या में ऐसे सवाल शामिल थे जो असली परीक्षा से मेल खा रहे हैं. दावा किया जा रहा है कि करीब 720 अंकों के पेपर में लगभग 600 अंकों के सवाल बिलकुल एक जैसे ही पाए गए हैं.इतना ही नहीं, कई सवालों के विकल्पों का क्रम भी कथित तौर पर वास्तविक प्रश्न पत्र जैसा था. मतलब यह कि गेस पेपर के जरिए ही असली पेपर को वायरल किया गया है.
कौन है राकेश मंडावरिया?
यह गेस पेपर सबसे पहले राजस्थान के राकेश मंडावरिया के पास पाया गया था. जो कि राजस्थान के सीकर जिले के खंडेला तहसील स्थित समर्थपुरा गांव का रहने वाला है. वह लंबे समय से अपने से दूर ही रहा रहा है. गांव वालों की माने तो जब उसने कक्षा 10 वीं की परीक्षा पास की थी, उसी के साथ ही गांव भी छोड़ दिया था. इसके बाद उसने BDS की पढ़ाई शुरू की.
पिछले चार-पांच वर्षों से वह सीकर की पिपराली रोड पर मेडिकल एडमिशन और काउंसलिंग से जुड़ा ऑफिस चला रहा था. बताया जा रहा है कि वहां MBBS समेत मेडिकल कोर्स में प्रवेश संबंधी सलाह दी जाती थी. जां
केरल से सीकर तक कैसे पहुंचा पेपर?
जांच में यह भी सामने आया है कि कथित गेस पेपर एक MBBS छात्र के जरिए भेजा गया था, जो मूल रूप से राजस्थान के चूरू का रहने वाला बताया जा रहा है और फिलहाल केरल में पढ़ाई कर रहा है. इसी छात्र के माध्यम से प्रश्नों की फाइल सबसे पहले मंडावरिया तक पहुंचाई गई थी. इसके बाद यह सामग्री अलग-अलग छात्रों और ग्रुप्स में शेयर हुई या नहीं, इसकी जांच जारी है. हालांकि एसओजी की जांच में सामने आया है कि यह पेपर कई जगहों पर भेजा गया है.
सिर्फ व्हाट्सएप नहीं, एन्क्रिप्टेड ऐप्स भी जांच के घेरे में
जांच एजेंसियों को शक है कि प्रश्नों का आदान-प्रदान सिर्फ व्हाट्सऐप तक सीमित नहीं था. कई एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप के इस्तेमाल की भी आशंका जताई जा रही है. कुछ चैट्स में “फॉरवर्डेड मेनी टाइम्स” जैसे इंडिगेटर मिलने की बात भी सामने आई है.
सीकर फिर क्यों चर्चा में?
राजस्थान का सीकर पहले भी प्रतियोगी परीक्षाओं और कोचिंग नेटवर्क को लेकर चर्चा में रहा है. यहां बड़ी संख्या में मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी कराने वाले संस्थान हैं. ऐसे में अगर जांच में गड़बड़ी साबित होती है तो यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कोचिंग और एडमिशन नेटवर्क पर भी सवाल उठ सकते हैं.
बताया जा रहा है कि स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) डिजिटल चैट, कॉल रिकॉर्ड और बैंकिंग ट्रांजैक्शन समेत कई तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही है.
NTA का बयान भी आया सामने
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने नीट यूजी 2026 परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक से जुड़े मामलों पर बयान भी जारी किया है. इसमें कहा गया कि परीक्षा के दौरान कई स्तरों पर सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए गए थे. परीक्षा के चार दिन बाद यानी 7 मई 2026 की देर शाम एनटीए को कथित कदाचार और अनियमितताओं से जुड़ी सूचनाएं मिली थीं. एनटीए ने स्पष्ट किया है कि मामला अभी जांच के दायरे में है और संबंधित एजेंसियां तथ्यों की पुष्टि करेंगी.
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